हमारे संस्कार ही हमारी संस्कृति की धरोहर है : राज्यपाल बेबी रानी मौर्य

राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने सिहनीवाला शेरपुर, देहरादून में बिरला ओपन माईंड इंटरनेशनल स्कूल का विधिवत शुभारम्भ किया. इस अवसर पर राज्यपाल ने स्कूल के संस्थापकों, शिक्षकों तथा विद्यार्थियों को बसंत पंचमी की बधाई व शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बसंत पंचमी शिक्षा और ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा व उमंग व उल्लास का दिन है. हमें अपने संस्कार, परम्पराएं, तीज-त्यौहार भूलने नहीं चाहिए. राम, कृष्ण व सरस्वती माॅ व अच्छे गुरू हमारे आदर्श है. बच्चों में सीखने की अच्छी क्षमता होती है तथा उनका मन एक खाली स्लेट की तरह होता है. अपने बच्चों को संस्कार देना व अपनी परम्पराओं से अवगत कराना बहुत जरूरी है. हमारे संस्कार ही हमारी संस्कृति की धरोहर है.

राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थी देश का भविष्य है. स्कूलों के वातावरण तथा शिक्षा की गुणवत्ता से देश का भविष्य निर्धारित होता है. शिक्षा में नैतिक व सांस्कृतिक मूल्यों का समावेश होना भी आवश्यक है. बच्चों को निर्धनों की सेवा, समाज कल्याण व राष्ट्रप्रेम के लिए प्रेरित करने वाली शिक्षा देना आवश्यक है. आज हम इन्टरनेट के युग में जी रहे है. आज इंटरनेट के माध्यम से सूचनाओं और ज्ञान का असीमित भण्डार हमारे पास है. परन्तु उपयोगी व ज्ञानवर्द्धक जानकारी को पहचानना व उसका उपयोग करना आवश्यक है. मोबाइल, लैपटाप, टैब जैसे उपकरणों के लाभ और हानि दोनों हैं. बच्चे सोशल मीडिया के प्रति जागरूक बनें लेकिन उनके आदी न बनें. बच्चों को तकनीकी से दूर नहीं किया जा सकता है लेकिन उनके सही प्रयोग के प्रति शिक्षित करना भी जरूरी है. बच्चों में खेलों के प्रति रूचि विकसित करनी होगी. अभिभावकों को बच्चों को पर्याप्त समय देना चाहिए.राज्यपाल ने कहा कि सूचना तकनीकी के समय में शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ा बदलाव आया है. इसलिए स्कूलों को अपनी अध्ययन व अध्यापन पद्धति को भी समय के अनुसार बदलने की जरूरत है.

राज्यपाल ने कहा कि शिक्षकों की विद्यार्थियों के जीवन में बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका है. बच्चें शिक्षकों को अपना आदर्श मानते है. शिक्षकों का व्यक्तित्व व आचरण बच्चों को बहुत अधिक प्रभावित करता है. बच्चों को मात्र पाठ्यपुस्तकों के अध्ययन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए. हमें बच्चों के चरित्र निर्माण, मानसिक विकास सहित सर्वांगीण विकास पर ध्यान देना चाहिए. शिक्षक में पिता का स्नेह, मित्रवत व्यवहार होना जरूरी है. बच्चों को ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए कि वह अच्छा नागरिक बन सके व देश विकास में अपना योगदान दे सकें. बच्चों की प्रतिभा निखारने में सहयोग करना चाहिए. हम अपने बच्चों को बड़े सपने दिखाएं व उन सपनों को पूरा करने के लिए कड़े परिश्रम के लिए प्रेरित करें.

राज्यपाल ने कहा कि देहरादून की धरती प्राचीन काल से ही शिक्षा का केन्द्र रही है. देहरादून आचार्य द्रोण की नगरी है. इन्हीं घाटियों में कभी द्रोणाचार्य ने अर्जुन, भीम सहित पांच पांडवों को शिक्षा दी होगी. आधुनिक युग में भी देहरादून अपनी स्कूली शिक्षा के लिए विख्यात है. जिनको ऐसी पावन धरती पर शिक्षा अर्जन करने का अवसर मिल रहा है वे वास्तव में भाग्यशाली हैं. विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए शिक्षा मंत्री अरविन्द पाण्डेय ने कहा कि जीवन में डाॅक्टर, इंजीनियर, अधिकारी बनने व कैरियर में सफल होने से भी अधिक महत्वपूर्ण है अच्छा इन्सान बनना. बच्चों को माता-पिता की सेवा तथा बड़े व गुरूजनों के सम्मान करना चाहिए.