सामान्य वर्ग को 10 फीसदी आरक्षण पर राष्ट्रपति की मुहर

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को सामान्य वर्ग के गरीबों को नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण से संबंधित संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम 2019 को मंजूरी दे दी.

यह अधिनियम संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन कर सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का प्रावधान करता है.इसके तहत आठ लाख रुपये तक की वार्षिक आमदनी वालों को आरक्षण का लाभ प्राप्त होगा.

भारत की 95% आबादी को किसी न किसी रूप में आरक्षण का लाभ मिल सकेगा. कैबिनेट ने 8 लाख से कम आमदनी वाले परिवारों को इस दायरे में रखा है. 8 लाख रुपये के सालाना आमदनी का मतलब है कि अगर एक परिवार में 5 व्यक्ति हैं, तो प्रति व्यक्ति आय 13,000 से थोड़ी सी अधिक होगी. एनएसएसओ सर्वे 2011-12 के मुताबिक प्रति महीने ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति आय 2,625 रुपये है और शहरी क्षेत्रों में यह 6,015 रुपये के करीब. आर्थिक आधार पर 10% आरक्षण यदि लागू होता है तो अधिक आय वर्ग के ऊपर के सिर्फ 5 फीसदी परिवार ही इस दायरे से बाहर होंगे.

आरक्षण के लिए जमीन के मालिकाना हक के लिए जो आधार तय किया गया है, वह भी काफी विस्तृत है. कृषि जनगणना आंकड़े 2015-16 के अनुसार, भारत में जमीनों के मालि 86.2% मालिक 2 हैक्टेयर साइज से भी कम जमीन के मालिक हैं, जो 5 एकड़ से कम ही है. इस आधार के कारण भी आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा कवर होनेवाला है.