पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम दोषी करार, 17 जनवरी को सुनाई जाएगी सजा

शुक्रवार को पंचकूला सीबीआई की विशेष अदालत ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में गुरमीत राम रहीम समेत सभी को दोषी करार दिया सजा 17 जनवरी को सुनाई जाएगी. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड करीब 16 साल पुराना केस है. और डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम इसमें आरोपी है.

साल 2002 में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. छत्रपति अपने समाचार पत्र में डेरा से जुड़ी खबरों को प्रकाशित करते थे. पत्रकार छत्रपति के परिजनों ने मामला दर्ज करवाया था और बाद में इसे सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया था. सीबीआई ने 2007 में चार्जशीट दाखिल कर दी थी और इसमें डेरा प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम को हत्या की साजिश रचने का आरोपी माना था.

पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत में चल रहे इस मामले में आरोपी गुरमीत राम रहीम को विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया था जबकि अन्य आरोपी प्रत्यक्ष तौर पर कोर्ट में मौजूद रहें. बता दें कि गुरमीत राम रहीम इस समय रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है. फैसले के मद्देनजर पंचकूला शहर, में कड़ी सुरक्षा की गई है. पंचकूलला में कोर्ट प‍रिसर में सीबीआइ के विशेष जज को कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट परिसर में लाया गया था.

राम रहीम सुनारिया जेल में दो साध्वियों से दुष्‍कर्म के मामले में 20 साल कैद की सजा काट रहा है. इसके अलावा जमानत पर चल रहे आरोपित कोर्ट में हाजिर होंगे. फैसले के मद्देनजर सुनारिया जेल के आसपास मुख्य नाकों पर पुलिसकर्मी सख्त जांच पड़ताल के बाद ही लोगों को गुजरने दे रहीं है. जेल परिसर के आसपास ड्रोन कैमरे और घोड़ा पुलिस के माध्यम से सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए है.

डीसीपी कमलदीप गोयल ने बताया ‘भारी संख्या में पुलिसबल को तैनात कर दिया गया है. कोर्ट परिसर में 500 की संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया है. यहां बैरिकेडिंग भी कर दी गई है.’ गौरतलब है कि पत्रकार छत्रपति की हत्या के मामले में शुक्रवार को पंचकूला की विशेष सीबीआई कोर्ट से डेरा प्रमुख को विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फैसला सुनाया जाएगा. इसके अलावा विभिन्न सेक्टरों में नाकेबंदी की गई है. शहर के आने और जाने वाले इलाकों, बस स्टैंड, अस्पताल और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष नजर रखी जा रही है.

इस मामले में सीबीआइ की ओर से 46 गवाह कोर्ट में पेश किये गये थे. जबकि बचाव पक्ष की ओर 21 गवाही पेश किये गये थे. हत्या के चश्मदीद रामचंद्र के बेटे अंशुल और अदिरमन थे. जिन्होंने कोर्ट में आंखों देखी ब्यां की थी. इसके अलावा हत्या के षड्यंत्र के बारे में गवाह खट्टा सिंह ने कोर्ट में बयान दिए थे. साथ ही डाक्टरों की भी गवाहियां हुई थी. बचाव पक्ष की दलीलें थी कि राम रहीम का पहली बार 2007 में केस में सामने आया था. साथ ही किसी भी आरोपित की पहचान नहीं हुई थी.