मेरे खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप झूठे : आलोक वर्मा

आलोक वर्मा ने शुक्रवार को कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप झूठे, अप्रमाणित हैं. आलोक वर्मा का सीबीआई निदेशक के तौर पर कमान संभालने के 48 घंटे के भीतर तबादला कर दिया गया.

विशेष निदेशक राकेश अस्थाना द्वारा लगाए गए अरोपों का जिक्र करते हुए आलोक वर्मा ने कहा, “यह दुखद है कि मेरे विरोधी सिर्फ एक व्यक्ति द्वारा लगाए गए झूठे, अप्रमाणित, हल्के आरोपों के आधार पर मेरा तबादला कर दिया गया.”

वर्मा को उच्चस्तरीय चयन समिति ने 2-1 के फैसले से गुरुवार शाम को उनके पद से हटा दिया था. इस समिति के सदस्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई द्वारा नामित न्यायमूर्ति ए.के.सीकरी शामिल थे.

इस बैठक में न्यायमूर्ति सीकरी ने केंद्रीय सर्तकता आयोग (सीवीसी) के निष्कर्षो के आधार पर सरकार का पक्ष लिया कि आलोक वर्मा को पद से हाटाया जाना चाहिए. मल्लिकार्जुन खड़गे ने बहुमत के फैसले का विरोध किया. उन्होंने फैसले से असहमति जाहिर की.

आलोक वर्मा 1979 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. उन्हें राकेश अस्थाना के साथ टकरार सार्वजनिक होने के बाद 23 अक्टूबर को छुट्टी पर भेज दिया गया था. आलोक वर्मा को सुप्रीमकोर्ट ने मंगलवार को फिर से सीबीआई निदेशक के तौर पर बहाल कर दिया.

आलोक वर्मा ने गुरुवार रात कहा, “मैंने संस्था की अखंडता बनाए रखने की कोशिश की और अगर मौका मिला तो कानूनी नियमों को बनाए रखने के लिए फिर से ऐसा करूंगा.” उन्होंने कहा कि सीबीआई भ्रष्टाचार से निपटने वाली एक प्रमुख जांच एजेंसी है, एक ऐसी संस्था है जिसकी स्वतंत्रता को संरक्षित और सुरक्षित किया जाना चाहिए.

उन्होंने कहा, “इसे बिना किसी बाहरी प्रभावों यानी दखलअंदाजी के कार्य करना चाहिए. मैंने संस्था की साख बनाए रखने की कोशिश की है, जबकि इसे नष्ट करने के प्रयास किए जा रहे हैं.” उन्होंने सरकार व सीवीसी के 23 अक्टूबर के आदेशों का जिक्र करते हुए कहा, “इसे केंद्र सरकार और सीवीसी के 23 अक्टूबर, 2018 के आदेशों में देखा जा सकता है जो बिना किसी अधिकार क्षेत्र के दिए गए थे.” सरकार व सीवीसी के 23 अक्टूबर के आदेश में आलोक वर्मा को उनके अधिकारों से वंचित कर उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया था.

समिति की बैठक के तुंरत बाद आलोक वर्मा को 31 जनवरी तक के लिए अग्निशमन सेवा, नागरिक सुरक्षा और होम गार्ड का महानिदेशक नियुक्त कर दिया गया. आलोक वर्मा का कार्यकाल 31 जनवरी को समाप्त हो रहा है. सरकार ने अगले निदेशक की नियुक्ति तक सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक एम.नागेश्वर राव को अंतरिम निदेशक के रूप में जिम्मेदारी सौंपी.

सरकार ने निदेशक, सीबीआई के कर्तव्यों की देखरेख के लिए सीबीआई के अतिरिक्त निदेशक एम. नागेश्वर राव को भी वापस ले लिया, जब तक कि एक नए निदेशक की नियुक्ति नहीं होती है और अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा एक अधिसूचना में कहा गया है .