ये है कुम्भ 2019 के मुख्य आकर्षण…

कुम्भ मेला भारत एवं विश्व के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर का एक केन्द्र माना जाता है और करोड़ों तीर्थयात्री इसी आस्था से प्रयागराज में पर्व के दौरान पधारते हैं. उत्तर प्रदेश सरकार ने इसके आयोजन के लिए ‘दिव्य कुम्भ और भव्य कुम्भ’ की परिकल्पना की है और इसी परिदृश्य में कुम्भ नगरी का चहुँमुखी विकास किया जा रहा है. यह अत्यंत हर्ष और सौभाग्य का विषय है कि अगले वर्ष के आरम्भ में 15 जनवरी से 4 मार्च, 2019 तक प्रयागराज में संगम तट पर पवित्र कुम्भ मेले का आयोजन हो रहा है.

प्रयागराज की पवित्र धरती भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत की पहचान रही है. प्रयागराज ही वह एकमात्र पवित्र स्थली है, जहां देश की तीन पावन नदियां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती मिलती हैं. कुम्भ को भारतीय संस्कृति को महापर्व कहा गया है. प्रयागराज के इस संगम में कुम्भ के समय कई परम्पराओं, भाषाओं और लोगों का भी अद्भुत संगम होने वाला है. संगम तट पर स्नान और पूजन का तो विशिष्ट महत्व है ही, साथ ही कुम्भ का बौद्धिक, पौराणिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक आधार भी है. एक प्रकार से कहें तो कुम्भ स्नान और ज्ञान का भी अनूठा संगम सामने लाता है.

गंगा, यमुना व सरस्वती नदियों के संगम और स्वार्गिक अमृत से पवित्र भू-भाग प्रयागराज लोकप्रिय कुम्भ मेला के चार स्थानों में से एक है. उत्तर प्रदेश का यह शहर जो कुम्भ मेला- 2019 का आयोजन करेगा इन हिन्दू तीर्थयात्रियों और इतिहास के उत्साही अध्येताओं के लिए एक खजाना है जो प्राचीन मंदिरों, स्मारको तथा अनेक पर्यटक स्थलो का भ्रमण करके आनन्दित हो सकते हैं. त्रिवेणी संगम जिसका शहर के दर्शनीय स्थलों में प्रथम स्थान सुरक्षित है, के अतिरिक्त प्रयागराज के पर्यटन आकर्षण हनुमान मंदिर, मनकामेश्वर, ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण अशोक स्तम्भ और उपनिवेशिक काल का स्वराज भवन जैसे अनेक भवनों को कुम्भ मेला के दर्शन के समय कैमरे में कैद करना अपेक्षित है.

कुम्भ 2019 के मुख्य आकर्षण(टूरिस्ट वॉक)
पेशवाई (प्रवेशाई): पेशवाई का मार्ग, तिथि, समय एवं दल में सदस्यों की अनुमानित संख्या पूर्व निर्धारित होती है, जिससे मेला प्रशासन एवं अन्य सेवा दल आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित कर सके.

सांस्कृतिक संयोजन: उत्तर प्रदेश राज्य सरकार एवं भारत सरकार ने भारत की समृद्ध व विभिधतापूर्ण सांस्कृतिक विरासत का निदर्शन कराने हेतु सभी राज्यों के संस्कृति विभागों को गतिशील किया है. कुंभ मेला, 2019 में पांच विशाल सांस्कृतिक पंडाल स्थापित किये जायेंगे. जिनमें जनवरी, 2019 में एवं आगे दैनिक आधार पर सांगीतिक प्रस्तुति से लेकर पारंपरिक एवं लोक नृत्य के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक श्रृंखला आयोजित की जायेगी.

नए और आकर्षक टूरिस्ट वॉक: पर्यटक-भ्रमण-पथों का विवरण प्रयागराज पर्यटन की बेवसाइट पर उपलब्ध होगी. इन पथो का संक्षिप्त विवरण निम्नवत् है.

  • यात्रा का आरंभ बिन्दु: शंकर विमान मण्डपम.
  • पहला पड़ाव: बड़े हनुमान जी का मंदिर.
  • दूसरा पड़ाव: पतालपुरी मंदिर.
  • तीसरा पड़ाव: अक्षयवट.
  • चौथा पड़ाव: इलाहाबाद फोर्ट.
  • भ्रमण का अंतिम बिन्दु: रामघाट (भ्रमण रामघाट पर समाप्त होगा)

जलमार्ग: जल परिवहन प्राचीन काल से नदियों, झीलों व समुद्र के माध्यम से मानव सभ्यता की सेवा करता आ रहा है. इस 20 किमी0 लम्बे जल मार्ग पर अनेक टर्मिनल बनाये जायेंगे और बेहतर तीर्थयात्री अनुभवों के लिए मेला प्राधिकरण नौकायें व बोट उपलब्ध करायेगा.

लेजर लाइट शो: कुम्भ मेला-2019 में भारी संख्या में आने वाले तीर्थयात्रियों, धार्मिक गुरूओं तथा राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय पर्यटको के अनुभवों को बेहतर बनाने की चेष्टा में उत्तर प्रदेश सरकार लेजर प्रकाश एवं ध्वनि प्रदर्शन हेतु प्रावधान कर रही है, यह प्रदर्शन किले की दीवार पर दिसम्बर 2018 से संचालित किया जायेगा. लेजर प्रकाश एवं ध्वनि प्रदर्शन के समय सारणी हेतु इस वेब स्पेस पर नजर रखें.

परिचायक प्रवेशद्वार: इतिहास में पहली बार कुम्भ मेला-2019 बीस से अधिक परिचायक अस्थायी प्रवेशद्वारों का साक्षी होगा जो कि मेला प्रांगण की ओर जा रहे मार्गों को तथा मेले के विभिन्न सेक्टरों को चिन्हित करेंगे.

प्रयागराज कुम्भ 2019 में विशेष स्नान दिवस
कुंभ मेला हिन्दू तीर्थयात्राओं में सर्वाधिक पावन तीर्थयात्रा है. प्रयागराज कुंभ में अनेक कर्मकाण्ड सम्मिलित हैं और स्नान कर्म कुंभ के कर्मकाण्डों में से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है. करोड़ों तीर्थयात्री और आगंतुक दर्शकगण कुंभ मेला स्नान कर्म में प्रतिभाग करते हैं. त्रिवेणी संगम पर पवित्र डुबकी लगायी जाती है. कुंभ मेला में स्नान करने के लिए ये महत्वपूर्ण तिथि है.

मकर संक्रान्ति: (15 जनवरी, 2019) एक राशि से दूसरी राशि में सूर्य के संक्रमण को ही संक्रान्ति कहते हैं . भारतीय ज्योतिष के अनुसार बारह राशियां मानी गयी हैं- मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ और मीन, जनवरी महीने में प्रायः 14 तारीख को जब सूर्य धनु राशि से (दक्षिणायन) मकर राशि में प्रवेश कर उत्तरायण होता है तो मकरसंक्रांति मनायी जाती है . लोग व्रत स्नान के बाद अपनी क्षमता के अनुसार कुछ न कुछ दान अवश्य करते हैं.

पौष पूर्णिमा: (21 जनवरी, 2019) भारतीय पंचांग के पौष मास के शुक्ल पक्ष की 15वीं तिथि को पौष पूर्णिमा कहते हैं. पूर्णिमा को ही पूर्ण चन्द्र निकलता है. कुम्भ मेला की अनौपचारिक शुरूआत इसी दिवस से चिन्हित की जाती है. इसी दिवस से कल्पवास का आरम्भ भी इंगित होता है.

मौनी अमावस्या: ( 4 फरवरी, 2019) यह व्यापक मान्यता है कि इस दिन ग्रहों की स्थिति पवित्र नदी में स्नान के लिए सर्वाधिक अनुकूल होती है. इसी दिन प्रथम तीर्थांकर ऋषभ देव ने अपनी लंबी तपस्या का मौन व्रत तोड़ा था और यहीं संगम के पवित्र जल में स्नान किया था. इस दिवस पर मेला क्षेत्र में सबसे अधिक भीड़ होती है.

बसंत पंचमी: (10 फरवरी, 2019) हिन्दू मिथकां के अनुसार विद्या की देवी सरस्वती के अवतरण का यह दिवस ऋतु परिवर्तन का संकेत भी है. कल्पवासी बसंत पंचमी के महत्व को चिन्हित करने के लिए पीत वस्त्र धारण करते हैं.

माघी पूर्णिमा: ( 19 फरवरी, 2019) यह दिवस गुरू बृहस्पति की पूजा और इस विश्वास कि हिन्दू देवता गंधर्व स्वर्ग से पधारे हैं, से जुड़ा है. इस दिन पवित्र घाटो पर तीर्थयात्रियों की बाढ़ इस विश्वास के साथ आ जाती है कि वे सशरीर स्वर्ग की यात्रा कर सकेगें.

महाशिवरात्रि: (4 मार्च , 2019) यह दिवस कल्पवासियों का अन्तिम स्नान पर्व है और सीधे भगवान शंकर से जुड़ा है. और माता पार्वती से इस पर्व के सीधे जुड़ाव के नाते कोई भी श्रद्धालु शिवरात्रि के व्रत ओर संगम स्नान से वंचित नहीं होना चाहता. कहते हैं कि देवलोक भी इस दिवस का इंतजार करता है.