जानें हल्दी के चमत्कारिक औषधीय गुण

हल्दी (टर्मरिक) भारतीय वनस्पति का पौधा है जिसमें जड़ की गाठों में हल्दी मिलती है. हल्दी को आयुर्वेद में प्राचीन काल से ही एक चमत्कारिक द्रव्य के रूप में मान्यता प्राप्त है. औषधि ग्रंथों में इसे हल्दी के अतिरिक्त हरिद्रा, कुरकुमा लौंगा, वरवर्णिनी, गौरी, क्रिमिघ्ना योशितप्रीया, हट्टविलासनी, हरदल, कुमकुम, टर्मरिक नाम दिए गए हैं.

आयुर्वेद में हल्‍दी को एक महत्‍वपूर्ण औषधि कहा गया है. भारतीय रसोई में इसका महत्वपूर्ण स्थान है और धार्मिक रूप से इसको बहुत शुभ माना जाता है. भारतीय विवाह में हल्दी की रसम का अपना एक विशेष महत्व है.

रसोई की शान होने के साथ-साथ हल्दी कई चमत्कारिक औषधीय गुणों से भरपूर है. आयुर्वेद में तो हल्‍दी को बेहद ही महत्वपूर्ण माना गया है क्योंकि हल्दी गुमचोट के इलाज में तो सहायक है ही साथ ही कफ-खांसी सहित अनेक बीमारियों के इलाज़ में काम आती है. इसके अलावा हल्दी सौन्दर्यवर्धक भी मानी जाती है. इसका उपयोग रूप को निखारने के लिए किया जाता रहा है. वर्तमान समय में हल्दी का प्रयोग उबटन से लेकर विभिन्न तरह की क्रीमों में भी किया जा है.

हल्दी पाचन तन्त्र की समस्याओं, गठिया, रक्त-प्रवाह की समस्याओं, कैंसर, जीवाणुओं (बेक्टीरिया) के संक्रमण, उच्च रक्तचाप और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल की समस्या और शरीर की कोशिकाओं और कफ़-वात शामक, पित्त रेचक व पित्त शामक है. रक्त स्तम्भन, मूत्र रोग, गर्भश्य, प्रमेह, त्वचा रोग, वात-पित्त-कफ़ में इसका प्रयोग बहुत लाभकारी है. यकृत की वृद्धि में इसका लेप किया जाता है. नाड़ी शूल के अतिरिक्त पाचन क्रिया के रोगों अरुचि (भूख न लगना) विबंध, कमला, जलोधर व कृमि में भी यह लाभकारी पाई गई है.