एलोवेरा के ये औषधीय गुण जानकर आप हो जाएंगे हैरान

घृत कुमारी या अलो वेरा/एलोवेरा, जिसे क्वारगंदल, या ग्वारपाठा के नाम से भी जाना जाता है, एक औषधीय पौधे के रूप में विख्यात है. इसकी उत्पत्ति संभवतः उत्तरी अफ्रीका में हुई है. एलोवेरा को सभी सभ्यताओं ने एक औषधीय पौधे के रूप में मान्यता दी है और इस प्रजाति के पौधों का इस्तेमाल पहली शताब्दी ईसवी से औषधि के रूप में किया जा रहा है. इसका उल्लेख आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में मिलता है.

एलोवेरा के अर्क का प्रयोग बड़े स्तर पर सौंदर्य प्रसाधन और वैकल्पिक औषधि उद्योग जैसे चिरयौवनकारी (त्वचा को युवा रखने वाली क्रीम), आरोग्यी या सुखदायक के रूप में प्रयोग किया जाता है.

वर्णन

एलोवेरा का पौधा बिना तने का या बहुत ही छोटे तने का एक गूदेदार और रसीला पौधा होता है जिसकी लम्बाई 60-100 सेंटीमीटर तक होती है. इसका फैलाव नीचे से निकलती शाखाओं द्वारा होता है. इसकी पत्तियां भालाकार, मोटी और मांसल होती हैं जिनका रंग, हरा, हरा-स्लेटी होने के साथ कुछ किस्मों में पत्ती के ऊपरी और निचली सतह पर सफेद धब्बे होते हैं. पत्ती के किनारों पर की सफेद छोटे दाँतों की एक पंक्ति होती है. गर्मी के मौसम में पीले रंग के फूल उत्पन्न होते हैं.

एलोवेरा के रस में कई रासायनिक तत्वों के गुण भी पाए जाते हैं जैसे अमीनो एसिड , विटामिन और खनिज पाए जाते है. इसके अलावा कई अन्य यौगिक तत्व भी इसमें पाए जाते हैं.

जानिए एलोवेरा के औषधीय गुण 

पाचन क्रिया में सहायक -: आपने हमेशा पेट में गैस बनना और खाने के न पचने की समस्यां के बारे में तो सुना ही होगा. हमारे शरीर में पेट संबंधी कोई भी बीमारी हो तो आप 20 ग्राम एलोवेरा के रस में शहद और नींबू मिलाकर सेवन करें. यह पेट की बीमारी को दूर तो करता ही है. साथ ही साथ पाचन शक्ति को भी बढ़ाता है.

कब्ज की समस्यां -: यह समस्यां हमें अक्सर सुनने को मिलती है. यह समस्यां किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है. इस रोग को दूर करने के लिए एलोवेरा के रस का सेवन करने से बहुत ज्यादा फायदा होता है. छोटे बच्चों में कब्ज के लिए जूस व हींग मिलाकर नाभि के चारों ओर लगा दें, इससे लाभ मिलेगा. इसके अलावा यकृत मे बड़ रही सूजन में इसके गुदे का सेवन सुबह-शाम करने से यकृत की कार्यक्षमता बढती है. इससे पीलिया रोग भी दूर होता है.

इम्युनी सिस्टम -: एलोवेरा पौधे के रस में रोगों से लड़ने की क्षमता होती है. क्योंकि इसमें रोग प्रतिरोधक तत्व मौजूद होतें हैं. जो हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. जिससे शरीर में चुस्ती व स्फूर्ति बनी रहती है.

ह्रदय रोग और मोटापा -: आज की सबसे जटिल समस्यां हमारे शरीर में बढ़ता मोटापा है. जो ह्रदय रोग होने का मुख्य कारण बनती है. मोटापे से शरीर में तेजी से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और रक्तवाहिनियों में वसा का जमाव होता है. ऐसी स्थिति में एलोवेरा का रस बेहद फायदेमंद होता है. एलोवेरा जूस रोजाना 20मिली-30मिली की मात्रा में पीने से शरीर में अन्दर से भरपूर तन्दुरूस्ती तथा ताजगी का अहसास होता है तथा ऊर्जा का उच्च स्तर बना रहता है. इससे वजन भी शरीर के अनुकूल रहता है.

मुंह की सफाई -: जख्म घाव जलन जैसी कोई भी समस्यां हो या फिर मुंह पर पड़ रहे छालों को दूर करना. इन सभी समस्यांओं में एलोवेरा का इस्तेमाल करना चाहिए.

जख्म या घाव -: शरीर में किसी भी प्रकार का जख्म या घाव हो जाने पर एलोवेरा के गुदे को क्रीम की तरह लगानी चाहिए. इसके पत्तों के गूदे में जरा-सी पीसी हल्दी मिलाकर इस पेस्ट को एक पट्टी पर लगा लें और गांठ, फोड़े पर रखकर पट्टी बांध दे. फोड़ा पक कर स्वतः फुट जाएगा और मवाद निकल जाएगा.

एंटी सेप्टिक, एंटी बैक्टीरियल और एंटी फंगल -: इसमें कोई शक नही कि एलोवेरा दुनिया का सबसें बढि़या एंटीबाईटीक और एंटीसेप्टिक गुण वाला होता है. जो हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है. इसके अलावा हमारे शरीर को लगभग 21 अमीनोएसिड की जरूरत होती है. जिसमें एलोवेरा से 18 अमीनोएसिड की मात्रा को पूरा करता है. इन गुणों से भरपूर एलोवेरा में सेपोनिन नामक तत्व होता है. जो शरीर की अंदरूनी सफाई करता है तथा रोगाणु रहित रखने का गुण रखता है. इसके अलावा खतरनाक बीमारियों से निजात भी दिलाता है. यह एड्स जैसी बीमारी में भी खास साबित होता है.

कोलेस्ट्रॉल का स्तर बनाए रखने में सहायक -: हमारे शरीर में मोटापा होने से शरीर में कोलेस्ट्रॉल तेजी से बढ़ता है. इसी कोलेस्ट्रॉल को कम करने में एलोवेरा सबसे महत्वपूर्ण रूप से काम करता है.

मधुमेह से लड़ने में -: यदि आप डायबिटीज की समस्यां से परेशान हैं तो 10 ग्राम एलोवेरा के रस में 10 ग्राम करेले का रस मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करने से डायबिटीज से मुक्ति मिल जाएगी. साथ ही 20 ग्राम आंवले के रस में 10 ग्राम एलोवेरा के गूदे को मिलाकर प्रतिदिन सुबह सेवन करें. यह शूगर की बीमारी को दूर करेगा.