जानिए जीरे के औषधीय गुण…

जीरा (वानस्पतिक नाम:क्यूमिनम सायमिनम) ऍपियेशी परिवार का एक पुष्पीय पौधा है. यह पूर्वी भूमध्य सागर से लेकर भारत तक के क्षेत्र का देशज है. इसके प्रत्येक फल में स्थित एक बीज वाले बीजों को सुखाकर बहुत से खानपान व्यंजनों में साबुत या पिसा हुआ मसाले के रूप में प्रयोग किया जाता है. यह दिखने में सौंफ की तरह होता है. संस्कृत में इसे जीरक कहा जाता है, जिसका अर्थ है, अन्न के जीर्ण होने में (पचने में) सहायता करने वाला.

रसोई में आम प्रयोग होने वाला जीरा लम्बे समय से औषधीय गुणों के लिए जानकारों द्वारा इस्तेमाल किया जाता रहा है जिसमे नेत्र से संबधित बीमारियाँ , गैस ,पित्त और बुखार जैसी बीमारियाँ मुख्य है.

जानिए जीरे के फायदे

  • हम भूख नहीं लगने जैसी समस्या से पार पा सकते है और अगर आप भूख नहीं लगने जैसी समस्या है या खाना खाने का मन नहीं करता है तो आप अनार के रस के साथ इसका उपयोग कर सकते है
  • बवासीर की तकलीफ में भी आराम पाया जा सकता है और अगर आप मिश्री के साथ इसे पीते है है या इसका लैप बनाकर लगाते है तो इस से जल्दी ही आराम मिलता है.
  • बिच्छु के काट लेने पर शहद में जीरे के चूर्ण और नमक मिलाकर डंक की जगह लगाने पर भी बड़ा आराम मिलता है.
  • मोटापे जैसी सर्वव्यापी बीमारी में हींग जीरा और काले नमक को समान मात्र में मिलकर चूर्ण बनालें और इसे दिन में थोड़ी थोड़ी मात्र में दो बार दही या पानी के साथ लेने पर भी मोटापे में राहत मिलती है.
  • मिचली होने पर भी आप जीरे की सहायता ले सकते है और खासकर जब प्रेगनेंसी में मिचली होती हो तो एक काम करें नीबू  के रस की  खटाई बनाकर उसमे जीरा मिला कर  देने पर मितली दूर हो जाती है. अगर ये समस्या बच्चो के साथ है तो समान मात्र में जीरा लॉन्ग कालीमिर्च और शक्कर को मिलकर चूर्ण बनाकर इसे शहद के साथ देने से बच्चो की ये परेशानी दूर हो जाती है.
  • और तो और बुखार में भी जीरे का उपयोग किया जा सकता है अगर किस को बुखार है तो जीरे के साथ गुड को मिलकर 10 10 ग्राम सामान मात्र की गोलियां बना लें और एक एक गोली दिन में तीन से चार बार देने से शरीर के तापमन को कम करने में मदद मिलती है .