जानिए कढ़ी पत्‍ते के औषधीय गुण…

कढ़ी पत्ता अकसर रसेदार व्यंजनों में इस्तेमाल होता है. दाल सब्‍जी का जायका बढ़ाने के लिए कढ़ी पत्‍ते का इस्‍तेमाल भारतीय रसोइयों में सदियों से होता चला आ रहा है. इसकी बस चार पांच पत्तियां ही भोजन का स्‍वाद बढ़ाने के लिए काफी होती है. ये पत्तियां बहुत ही ख़ुशबूदार होतीं है. इसके फूल छोटे-छोटे, सफ़ेद रंग के और ख़ुशबूदार होते है. इसके छोटे-छोटे, चमकीले काले रंग के फल तो खाए जा सकते है. लेकिन इनके बीज ज़हरीले होते है. कुछ लोग इसे “मीठी नीम की पत्तियां” भी कहते है. इसके तमिल नाम का अर्थ है, ‘वो पत्तियां जिनका इस्तेमाल रसेदार व्यंजनों में होता है’.

कन्नड़ भाषा में इसका शब्दार्थ निकलता है – “काला नीम”, क्योंकि इसकी पत्तियां देखने में कड़वे नीम की पत्तियों से मिलती-जुलती है. लेकिन इस कढ़ी पत्ते के पेड़ का नीम के पेड़ से कोई संबंध नहीं है. असल में कढ़ी पत्ता, तेज पत्ता या तुलसी के पत्तो. जो भूमध्यसागर में मिलनेवाली ख़ुशबूदार पत्तियां है.

भारतीय भोजन में इस्‍तेमाल होने वाले कई मसाले गैस बनाने का काम करते है. लेकिन, कुछ ऐसी चीजें भी है. जिन्‍हें भोजन में डालने से इस समस्‍या को काफी हद तक कम किया जा सकता है. जी हा. कढ़ी पत्ता पूरे भारत और खासकर दक्षिण भारतीय खाने खासतौर पर सांभर या रसम में कढ़ी पत्ते का सर्वाधिक उपयोग किया जाता है. वहीं उत्‍तर भारत में कढ़ी बनाने में मीठी नीम (कढ़ी पत्ता) का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है.

कढ़ी पत्‍ते के औषधीय गुण

  • जलने और घाव में भी कढ़ी पत्ते का इस्तेमाल किया जाता है.
  • उल्टी और अपच में कढ़ी पत्ते को नींबू के रस और चीनी के साथ लेना फायदेमंद होता है.
  • पेट में गड़बड़ी होने पर कढ़ी पत्ते को पीस छाछ में मिलाकर खाली पेट लेने पर आराम मिलता है.
  • कढ़ी पत्ते की जड़ में भी औषधीय गुण होते है. यह किडनी के रोगियों के लिए फायदेमंद होती है.
  • अगर आप अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं और कोई उपाय नहीं सूझ रहा है, तो रोज कुछ पत्तियां चबाए.
  • दस्त, पेचिश और बवासीर में नरम कढ़ी पत्तियों को शहद के साथ लेने पर आराम मिलता है.