जानिए दिवाली मनाने के पीछे जुड़ी रोचक कहानियां और परंपराएं

7 नवम्बर (बुधवार) को दिवाली पूरे भारत वर्ष में बड़े धूम-धाम से मनाई जाएगी. कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाले इस त्यौहार में लक्ष्मी-गणेश पूजन का महत्व बहुत अधिक है. ऐसी मान्यता है कि यदि माता महालक्ष्मी के साथ भगवान गणेश को प्रसन्न न किया जाएं तो भगवान गणेश की कृपा भी प्राप्त नहीं होती है.

दिवाली को दीपों का त्योहार भी कहा जाता है. लेकिन क्या आपको पता है दिवाली क्यों मनाई जाती है? आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि दिवाली क्यों मनाया जाता है.

दरअसल इसके पीछे अलग-अलग कहानियां हैं, अलग-अलग परंपराएं हैं। कुछ विद्वानों का मानना है कि जब भगवान श्रीराम 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या नगरी लौटे थे, तब उनकी प्रजा ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था.

वहीं दूसरी कथा के अनुसार जब भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध करके प्रजा को उसके आतंक से मुक्ति दिलाई तो द्वारका की प्रजा ने दीपक जलाकर उनको धन्यवाद दिया. एक और परंपरा के अनुसार सतयुग में जब समुद्र मंथन हुआ तो धन्वंतरि और देवी लक्ष्मी के प्रकट होने पर दीप जलाकर इसकी खुशी मनाई गई थी.

हालांकि इसके पीछे जो भी कहानियां हो, लेकिन ये बात निश्चित है कि दीपक आनंद प्रकट करने के लिए जलाए जाते हैं और खुशियां बांटने का काम करते हैं.