सुप्रीमकोर्ट का यह फैसला पटाखा व्यापारियों के लिए बना मुसीबत

जहां दिवाली की तारीख नजदीक आती जा रही है, वहीं पटाखा व्यापारियों के चेहरे खिलने की बजाय लटकते जा रहे हैं. मुनाफा कमाने के समय उन्हें ग्रीन पटाखों का इंतजार करना पड़ रहा है जोकि कहीं भी उपलब्ध नहीं हैं. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से साफ निर्देशित कर दिया गया है कि दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए दिवाली के दिन सिर्फ ग्रीन पटाखे ही जलाए जा सकते हैं लेकिन ग्रीन पटाखा आखिर है क्या? यह कोई भी बताने में समर्थ नहीं है.

व्यापारियों का कहना है कि यह ग्रीन पटाखे बना कौन रहा है और कहां से आएंगे इस बारे में उन्हें कोई भी जानकारी नहीं है. सदर बाजार क्रैकर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी हरजीत सिंह छाबड़ा से जब इस बाबत पूछा गया कि क्या ग्रीन पटाखे बाजारों में उपलब्ध हैं, तो उन्होंने कहा कि ग्रीन पटाखे होते क्या हैं यह पटाखा व्यापारियों को भी अभी तक पुलिस व प्रशासन की ओर से बताया नहीं गया है. यह पटाखे कहां से मिलेंगे और कब मिलेंगे इस बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने बताया कि जब भी पटाखा व्यापारी दुकान खोल रहे हैं पुलिस यह कह कर दुकानें बंद करवा दे रही है कि जल्द ही ग्रीन पटाखों की लिस्ट जारी की जाएगी. छाबड़ा का कहना है कि दिल्ली पुलिस शुक्रवार दोपहर तक ग्रीन पटाखों की लिस्ट जारी कर सकती है.

वहीं जामा मस्जिद के पाईंवालान बाजार में मैजेस्ट्री क्रैकर्स वक्र्स के मालिक महेश्वर दयाल श्रीवास्तव का कहना है कि शायद आकार में छोटे पटाखों को ग्रीन पटाखा कहा जा रहा है जिससे कम धुआं निकलता है.महेश्वर दयाल का कहना है इसीलिए वो नया माल बिल्कुल भी नहीं खरीद रहे हैं क्योंकि पहले ही उनका काफी पैसा पिछले साल बर्बाद हो चुका है. दिवाली की जगह निकल ना जाए दिवाला: पटाखा व्यापारियों का कहना है कि ग्रीन पटाखों के चक्कर में पिछले साल के रखे पटाखे भी पुलिस बेचने नहीं दे रही है जिससे पटाखा व्यापारियों को करोड़ों का नुकसान हो रहा है. वहीं यदि समय अधिक हो जाएगा तो यह पटाखे खराब हो जाएंगे, जिससे व्यापारियों का दिवाली में दिवाला निकल जाएगा.