जानें करवा चौथ व्रत में चन्द्रमा पूजा का महत्व

इस साल करवा चौथ व्रत 27 अक्टूबर 2018 को मनाया जाएगा. करवा चौथ के व्रत का महत्व हमेशा से ही सुहागिन स्त्रियों के लिए बहुत अधिक रहा है. करवा चौथ के व्रत में वैसे तो चौथ माता यानी माता पार्वती का पूजन किया जाता है.
लेकिन करवा चौथ के इस निर्जल व्रत को खोलने के लिए चन्द्रमा का महत्व बहुत अधिक है.

इस व्रत में ऐसा हो ही नहीं सकता कि कोई स्त्री बिना चन्द्रमा को अर्घ्य दिए करवा चौथ का व्रत पूरा करें. चन्द्रमा के दर्शन और अर्घ्य के बिना इस व्रत को सफल नहीं माना जाता है. लेकिन क्या आप ये जानते है कि करवा चौथ के व्रत में चन्द्रमा का महत्व इतना अधिक क्यों है? आइए इस करवा चौथ स्पेशल  में जानते है करवा चौथ में चन्द्रमा के महत्व के बारे में-

करवा चौथ व्रत में चन्द्रमा पूजा का महत्व
करवा चौथ व्रत में चन्द्रमा को अर्घ्य देकर उनका पूजन करने की मुख्य वजह यह है कि जिस दिन भगवान शिव ने क्रोध के कारण अपने पुत्र गणेश का सिर काट दिया था. उस समय उनका सिर कटकर सीधे चन्द्रलोक यानी चन्द्रमा पर जाकर गिरा था. जिसके बाद उन्हें हाथी का सिर लगाया गया था. प्राचीन मान्यताओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि भगवान गणेश का सिर आज भी वहीं मौजूद है. भगवान गणेश को ये वरदान था कि किसी पूजा से पहले उनकी पूजा की जाएगी. और यदि कोई मनुष्य ऐसा नहीं करेगा तो उसकी पूजा सफल नहीं मानी जाएगी.

यही कारण है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा तो होती ही है साथ ही भगवान गणेश का सिर चन्द्रलोक में होने की वजह से इस दिन चन्द्रमा की पूजा करने का खास महत्व है. साथ ही इस दिन भगवान शंकर, पार्वती और कार्तिकेय की भी पूजा की जाती है.

माता पार्वती की पूजा इसलिए की जाती है क्योंकि हर सौभाग्य व्रत की तरह पार्वती जी ने कठिन तपस्या कर भगवान शंकर को हासिल किया था और अखंड सौभाग्यवती का वरदान प्राप्त किया था. जिस तरह पार्वती जी को अखंड सौभाग्य का वरदान मिला था ठीक उसी तरह का सौभाग्य पाने के लिए सभी महिलाएं उपवास रखती है.यह व्रत पति-पत्नी के लिए प्रणय निवेदन व एक-दूसरे के प्रति पूर्ण समर्पण, अपार प्रेम, त्याग व विश्वास की चेतना लेकर आता है.

करवा चौथ शुभ मुहूर्त
करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त: 5:40 से 6:47 तक
करवा चौथ चंद्रोदय समय 7 बजकर 55 मिनट