‘हिमालया वियाग्रा’ एक ऐसा कीड़ा जिसकी कीमत करोड़ों में…

‘हिमालयी वियाग्रा’ के नाम से पहचाना जाने वाला ‘कैटरपिलर फंगस’ हिमालय के ऊंचे इलाको में मिलता है. इस कीड़े की सबसे बड़ी खासियत यह है की इसमें सेक्स पावर बढ़ाने का गुण होता है. इसलिए इसे हिमालयी वियाग्रा कहा जाता है. उत्तराखंड में यह ‘कीड़ा जड़ी’ के नाम से जाना जाता है. जो लोग यार्चागुंबा को चाय बनाने के लिए पानी में उबालते हैं या सूप में डालते है. उनका मानना है. कि यह नपुंसकता से लेकर कैंसर तक के इलाज में कारगर है. जो अब जलवायु परिवर्तन के कारण मिलना मुश्किल हो गया है.

सोने से ज्यादा कीमती
कीड़े की लोकप्रियता व इसके दाम आसमान छूने लगे है. बीजिंग में इसके दाम सोने की कीमत से तीन गुना ज्यादा तक पहुंच जाते है. कीड़े की इस भारी भरकम कीमत को देखकर आप अनुमान लगा सकते है. कि इसकी डिंमाड कितनी है. भारत, तिब्बत और नेपाल में बिकने वाले इस कीड़े के गुणों को देखकर इसे आयुर्वेदिक जड़ी बूटीयों की श्रेणी में रखा गया है. जिसे हिमालयी वियाग्रा के नाम से भी जाना जाता है.

सांस और गुर्दे की समस्‍या से भी निजात
आयुर्वेद में इसे काफी अच्छा उपचार बताया गया है जिसका सेवन करने से फायदे ज्यादा नुकसान ना के बराबर होता है. इसके कोई साइड इफेक्ट नही होते, पर दिल के मरीजों के लिये ये जान लेवा सिद्ध हो सकती है. क्योकि इस जड़ीबूटी का उपयोग सिर्फ सेक्स पावर को बढ़ाने के साथ सांस और गुर्दे की बीमारी कोल दूर करने के लिये किया जाता है.

मरने के बाद बनाया जाता है सेक्‍स पावर पाउडर
हिमालय के जंगली पहाड़ियों में पाये जाने वाले इस कीड़े का रंग भूरे और करीब 2 इंच लंबा होता है इसका जीवनकाल काफी कम 6 माह का होता है. यह कीड़े ठंड के दिनों में पहाड़ो पर उगने वाले कुछ ख़ास प्रकार के पौधों पर ही पैदा होते है, और गर्मी के समय में अपनी जीवनकाल पूरा करने का बाद मर जाते है. इनके मरने के बाद यह कीड़े पहाड़ियों में स्थित उन्हीं घास और पौधों के बीच बिखरे पड़े रहते है. जिन्हे एकत्रित कर उनको सुखाया जाता है फिर उसका पाउडर बनाकर इसका सेवनकर लोग अपनी सेक्स पावर को बढ़ाने इसका उपयोग करते है.

नेपाल में लगा दिया था प्रतिबंध
यार्सागुम्बा एक कीड़ा है जो मुख्यतः नेपाल में पाया जाता है. यार्सागुम्बा के इन्ही मृत कीड़ों का उपयोग आयुर्वेद में किया जाता है. चूंकि भारत में यह जड़ी बूटी प्रतिबंधित श्रेणी में है इसलिए इसे चोरी-छिपे इकट्ठा किया जाता है. नेपाल में भी 2001 तक इसपर प्रतिबंध था पर इसके बाद नेपाल सरकार ने प्रतिबंध हटा लिया.

60 लाख से लेकर एक करोड़ रुपए तक
यार्सागुम्‍बा पर प्रतिबंध है लेकिन मार्केट में इसकी डिमांड को देखते हुए इसकी कीमत 60 लाख रुपए से लेकर 1 करोड़ रुपए तक प्रतिकिलो ग्राम है. स्‍थानीय लोग सर्दियों में घरों को छोड़कर पर्वतीय क्षेत्रों में तम्‍बू पांडाल लगाकर इन कीड़ों की खोज में लगे रहते है.

मुनाफे के चक्‍कर में बड़ी तस्‍करी
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इसकी कीमत लाखों रुपये प्रति किलो है. महंगी होने के कारण इसकी तस्करी की संभावनाएं अधिक होती है. कुछ लोग ज्यादा मुनाफे के लालच में इसे तस्करों को भी बेच देते हैं क्योंकि सेक्स पॉवर बढ़ाने के गुण के कारण इसकी विदेशों खासकर चीन में काफी मांग रहती है.