पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन ऐसे करें श्राद्ध, पितृ हो जायेंगे सन्तुष्ट

श्राद्ध 9 अक्टूबर 2018, मंगलवार को समाप्त हो जाएंगे. आश्विन मास की अमावस्या श्राद्घ का अंतिम दिन होता है.यह दिन पितृ विसर्जन अमावस्या के नाम से विख्यात है जिन परिवारों को अपने पितरों की तिथि याद नहीं रहती है उनका श्राद्ध भी इसी अमावस्या को कर देने से पितृ सन्तुष्ट हो जाते है.

इस दिन ब्राह्मण को भोजन तथा दान देने से पितृ तृप्त होते हैं.उनको तृप्त करने वाले व्यक्ति को वो अनेकों आशीर्वाद देते है. ऐसा माना जाता है कि पितृपक्ष के आरम्भ होते ही पितृ अपने घरों में लौट कर आते है और पूरे पितृ पक्ष में अपने घर में ही वास करते है. लेकिन क्या आप ये जानते है कि पितृ पक्ष की अमावस्या की शाम को पितरों को विदा करने का भी विधान है.

अमावस्याकी शाम को पितरों को विदा करना बहुत जरुरी होता है.जो लोग श्राद्ध या पितृ विसर्जन नहीं करते है, उनको पितृ दोष लगता है. जिस प्रकार वो अपने धाम से श्राद्ध में तृप्त होने आते है ऐसे ही उन्हें वापस उनके धाम भी भेजना होता है.आइए जानते है क्या है पितरों को विदा करने की विधि-

सर्वप्रथम स्नानादि कर पवित्र हो जाएं.

  • अपने घर को स्वच्छ करें.
  • शाम होते ही अपने घर की चौखट के दोनों ओर दीप जलाकर रखें.दीपक जलाने का आशय उनके मार्ग को प्रकाशवान करना है.
  • एक दीपक प्रज्ज्वलित कर अपने हाथ में लेकर अपने पितरों का ध्यान करें.उनसे प्रार्थना करें कि परिवार में सदा सुख-शांति बनी रहे.
  • पितरों का स्मरण कर उन्हें कहें कि आप उन्हें मंदिर में ईश्वर के पास स्थान देंगे.
  • एक थाल में भोजन, जल और दीपक लेकर मंदिर जाएं.
  • पीपल के वृक्ष की छांव में जाकर पितरों से वहीं ईश्वर के चरणों में रहने की प्रार्थना करें.
  • उनके निमित्त भोजन और जल को वहीं रख दें.
  • यह भोजन उनके सालभर की तृप्ति हेतु दिया जाता है.
  • पूरी प्रक्रिया के बाद घर आकर घर के मंदिर में प्रभु को नमन करें.
  • ध्यान रखें कि पितृ विसर्जन की प्रक्रिया में पितरों को विदा करते समय परिवार का कोई भी व्यक्ति बात न करें