क्या है कालसर्प योग, जानिए कैसे इस दोष को करें दूर

कालसर्प योग क्या है..? कालसर्प दोष दूर करने के उपाय, अक्सर लोगों के मन में ऐसा उठते हैं। तो सबसे पहले जानिए क्या होता है कालसर्प योग. कालसर्प योग एक ऐसा योग है जो जातक के पूर्व जन्म में किए किसी पाप की वजह से उसकी कुण्डली में लगता है.ऐसा माना जाता है कि कालसर्प दोष का मुख्य कारण पिछले जन्म में सांप को मारना होता है. ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के अनुसार अगर समझा जाएं तो कालसर्प दोष तब होता है जब सभी ग्रह राहु-केतु के बीच में आ जाएं और बाकी के ग्रह केन्द्र की ओर हो.

उसका फल मनुष्य के जीवन में उसे तब तक मिलता रहता है, जब तक वो कालसर्प दोष को दूर करने के लिए उपाय नहीं कर लेता है.हालांकि कालसर्प योग वाले सभी जातकों पर इस योग का समान प्रभाव नहीं पड़ता है.

इस दोष का परिणाम हमेशा दुखद नहीं होता है.माना जाता है कि यह दोष व्यक्ति के जीवन में दुख या सुख अत्यंत रुप में देता है जिसका अर्थ यह हुआ कि कालसर्प दोष जिसकी कुण्डली में होता है,

वह व्यक्ति आर्थिक व शारीरिक रूप से परेशान तो होता ही है, मुख्य रूप से उसे संतान संबंधी कष्ट होता है.या तो उसे संतान होती ही नहीं, या होती है तो वह बहुत ही दुर्बल व रोगी होती है. उसकी रोजी-रोटी का जुगाड़ भी बड़ी मुश्किल से हो पाता है. धनाढय घर में पैदा होने के बावजूद किसी न किसी वजह से उसे अप्रत्याशित रूप से आर्थिक क्षति होती रहती है. तरह तरह के रोग भी उसे परेशान किये रहते हैं.

कालसर्प दोष को दूर करने के लिए व्यक्ति को भगवान शिव की शरण में जाना चाहिए.क्योकि भगवान शिव ही नाग यानि सर्पों के अधिष्ठाता देव है. उनकी उपासना करने वाले व्यक्ति को कभी भी कालसर्प दोष के नकारात्मक परिणामों को नहीं झेलना पड़ता है.

कालसर्प दोष दूर करने के उपाय

  • इस दोष को दूर करने के लिए शिवलिंग पर प्रतिदिन जल चढ़ाना चाहिए.
  • इस योग में महामृत्युंजय मंत्र का जप करना अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है. इस मंत्र की प्रतिदिन एक माला करने से लाभ मिलता है.
  • भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से शिव जल्द प्रसन्न हो करेंगे दोष को दूर.
  • नागपंचमी का व्रत करें और नाग देव की उपासना करें.
  • प्रतिदिन पक्षियों को दाना डालने से दोष का प्रभाव कम हो जाता है.
  • समुद्री फैन और समुद्र से निकलने वाले पत्थर और मोती आदि को अपने घर में रखें.
  • दक्षिणावर्ती शंख को अपने निवास स्थान पर मंदिर के स्थान पर रखें.रखने से पहले एक थाल में चावल भरें और साथ ही शंख को भी चावलों से भरकर पूजा स्थल के पास रख दें.
  • मोर के पंख से स्वयं को झाड़ा करें, ध्यान रखें कि अपने शरीर पर झाड़ा ऊपर से नीचे की ओर ही लगाएं.
  • शनिवार को पीपल के वृक्ष की पूजा करें.
  • शिवलिंग पर चांदी से बना नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाए.