नौसेना के पास बचे केवल 2 जहाज, कैसे होगी समुद्री सीमा की सुरक्षा

दुश्मन हर तरफ से भारत पर नजरें गढ़ाए हुए है. भारत में घुसपैठ करने की कोशिश थल और वायु के अलावा जल के रास्ते से होती है. आतंकवादी समुद्र के रास्ते से भी दाखिल होने की कोशिश करते है. भारतीय नौसेना के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि पूर्वी एवं पश्चिमी समुद्री सीमा क्षेत्र में हजारों किलोमीटर लंबी तटरेखा में फैले समुद्री मार्गों और बंदरगाहों की हिफाजत के लिए नौसेना के पास अभी सिर्फ दो ‘माइनस्वीपर’है. ऐसे में समुद्री सीमा की सुरक्षा कितने मायने रखती है. इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. जो देशवासियों की चिंता बढ़ाने वाली है.

जो पानी के भीतर बनाई गई बारूदी सुरंगों का पता लगाकर उन्हें नष्ट करती है. ऐसे जहाज को ‘माइनस्वीपर’ कहते है. स्वामीनाथन ने बताया कि नौसेना को बारूदी सुरंग हटाने वाले 12 जहाजों की जरूरत है लेकिन अभी उसके पास सिर्फ दो ऐसे जहाज है. स्वामीनाथन ने कहा, नौसेना इन जहाजों की तुरंत जरूरत है. सरकार 32,000 करोड़ रुपए की लागत वाली परियोजना के लिए एक विदेशी कंपनी की तलाश में है ताकि 12 माइनस्वीपर जहाजों की खरीद की जा सके. इन जहाजों का बुनियादी काम पानी के भीतर बनाई गई बारूदी सुरंगों का पता लगाना, उसे श्रेणीबद्ध करना और नष्ट करना है.

भारत के बड़े हिस्से की सीमा समुद्र से जुड़ी है. भारत का 7516.6 किलोमीटर हिस्सा समुद्री सीमा है. भारत सरकार ने समुद्री सीमाओं को महफूज करने के लिए अत्याधुनिक उपकरण भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड ने तैयार करने की बात कही थी. तटीय सामा पर बेहद संवेदनशील सर्विलांस सिस्टम लगाया जा रहा है. इसकी मदद से समुद्र में 20 किमी तक के इलाके में चप्पे चप्पे पर हर एक गति विधि पर नजर रखी जा सकती है. भारत सरकार भी इस बात की अहमियत को समझती है.