मोदी ने वोट के लिए सैनिकों की शहादत का इस्तेमाल किया : कांग्रेस

कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रधामंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर सैनिकों की शहादत का इस्तेमाल वोट के औजार के रूप में करने का आरोप लगाया. कांग्रेस ने 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी बरसी पर ‘पराक्रम पर्व’ मनाने को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की. सरकार ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार सैन्य कार्रवाई की बरसी पर सैन्य बल के शौर्य और शहादत की याद में 28-30 सितंबर को पराक्रम पर्व मनाने का फैसला किया.

कांग्रेस का कहना है कि 2016 की कार्रवाई ऐसी नहीं है कि यह पहली बार हुई है, बल्कि अतीत में भी इस तरह की कई सर्जिकल स्ट्राइक की गई है.

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “हमें अपनी सेना पर गर्व है कि इसने पिछले दो दशक से अधिक समय से खासतौर से 2000 के बाद से अनेक सर्जिकल स्ट्राइक किए हैं, जिनमें 21 जनवरी, 2000 (नीलम नदी के पार नडाला इन्क्लेव), 18 सितंबर, 2003 (पुंछ का बरोह सेक्टर), 19 जून, 2008 (पुंछ का भट्टल सेक्टर), 30 अगस्त से लेकर एक सितंबर, 2011 (केल की घाटी में नीलम नदी के पार शारदा सेक्ट), छह जनवरी, 2013 (सावन पात्रा चेकपोस्ट), 27-28 जुलाई, 2013 (नाजापीर सेक्टर), 14 जनवरी, 2014 (सेना प्रमुख जनरल विक्रम सिंह का बयान, जिसमें 23 दिसंबर, 2013 को सर्जिकल स्ट्राइक करने की बात का जिक्र), 28-29 सितंबर, 2016 (डीजीएमओ का बयान) उल्लेखनीय हैं.”

उन्होंने केंद्र सरकार पर राष्ट्र की सुरक्षा से समझौता करने का आरोप लगाया और कहा कि इस सरकार के 52 महीने के शासन के दौरान सिर्फ जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद में 414 सुरक्षाकर्मियों और 259 गैर-सैनिकों की जानें गईं.

उन्होंने कहा कि मोदी यह स्वीकार करें कि वह सीमा की सुरक्षा करने में विफल रहे हैं, क्योंकि मई 2014 से लेकर अबतक पाकिस्तान की ओर से संघर्षविराम का उल्लंघन करने की घटनाएं 500 फीसदी बढ़ गई हैं.

कांग्रेस नेता ने सवालिया लहजे में कहा, “56 इंच का सीना कहां है, क्योंकि पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा और अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर 3,000 बार संघर्षविराम का उल्लंघन किया है.”

उन्होंने कहा कि सरकार ने रक्षा बजट को घटाकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.58 फीसदी करके सैन्य बल के साथ सौतेला व्यवहार किया गया, क्योंकि रक्षा बजट 1962 के बाद सबसे कम है.

कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार ने रक्षा मामले की संसद की स्थाई समिति की उस रिपोर्ट को नजरंदाज किया है, जिसमें यह खुलासा किया गया है कि सेना के 68 फीसदी उपकरण पुराने हो गए हैं, क्योंकि आपातकालीन हथियार खरीदने के लिए कोई पैसा नहीं है.