ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध में दवा की दुकाने बंद, मरीजों की बढ़ी मुसीबतें

ऑनलाइन फार्मेसी के विरोध में शुक्रवार को दवा दुकानदारों ने देशभर में दुकानें बंद रखी है. दवा की दुकानें बंद होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

देहरादून में भी दवा कारोबारी हड़ताल पर है. दवा की दुकानें बंद होने से मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. सभी केमिस्ट दून अस्पताल के पास जैन मेडिकल पर एकत्र हुए है. वहीं गाजियाबाद के कई इलाकों में शुक्रवार सुबह व्यापारियों ने जाम लगाया और मेडिकल स्टोर समेत कई दुकाने बंद की. दिल्ली-एनसीआऱ में मेडिकल स्टोर के अलावा संयुक्त व्यापार मंडल से जुड़े व्यापारियों ने भी अपनी दुकानें बंद की.

हालांकि आपात स्थिति में अस्पतालों और नर्सिंग होम के मेडिकल स्टोर को इससे छूट दी गई है. दवा विक्रेता संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी से दवा की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा. यही नहीं इसका असर दुकानदारों और उससे जुड़े कर्मचारियों के रोजगार पर भी पड़ेगा.

ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट (एआईओसीडी) के संगठन सचिव और रिटेल डिस्ट्रब्यूटर्स केमिस्ट्स एसेासिएशन के अध्यक्ष संदीप नांगिया ने बताया कि केंद्र सरकार ऑनलाइन फार्मेसी को लेकर एक ड्रॉफ्ट पॉलिसी तैयार की है. उसके विरोध में हम एक दिन की सांकेतिक हड़ताल कर रहे है. इसमें देशभर के करीब 8 लाख दवा विक्रेता शामिल हो रहे है. उन्होंने कहा कि मानवीय आधार पर अस्पतालों और नर्सिंग होम में मौजूद मेडिकल स्टोर को इससे छूट दी गई है. एआईओसीडी के अध्यक्ष जेएस शिंदे ने बताया कि ऑनलाइन फार्मेसी पूरी तरह से व्यापार करने का जरिया है. देश में स्वास्थ्य व्यापार का केंद्र नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से बिना रोक-टोक के ऑनलाइन फार्मेसी को बढ़ावा दिया जा रहा है. उससे प्रतिबंधित दवाओं के प्रयोग पर रोक लगाना मुश्किल होगा.