उत्तराखंड : पलायन से खाली हुए 30 गांव फिर से होंगे आबाद

उत्तराखंड सरकार पलायन से खाली हुए गांवों को फिर से आबाद करने की शुरुआत से करने जा रही है. जिसकी शुरुआत सरकार पौड़ी जिले से करने जा रही है. पलायन आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद मीडिया से बात करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि बंजर गांवों को आबाद करने के लिए सरकार विस्तृत योजना पर काम कर रही है.

इसके लिए पलायन से खाली हुए गांवों को चिन्हित किया जा रहा है. इन गांवों में उपलब्ध संसाधनों की पहचान कर रहे हैं. इसमें पानी की उपलब्धता को प्राथमिकता दी जा रही है. यह भी देखा जा रहा है कि इन गांवों की आर्थिकी मजबूत करने को क्या-क्या योजनाएं बनाई जा सकती है.

सरकार की योजना है कि प्रारंभिक तौर पर ऐसे 30 गांवों को चिन्हित कर, उन्हें फिर से आबाद किया जाए. इसके लिए सरकारी एजेंसियों ने काम शुरू कर दिया है. सीएम ने कहा कि एक मॉडल तैयार हो जाने के बाद पूरे प्रदेश में इसे लागू किया जाएगा. इसके लिए सरकार इन गांवों में रह रहे परिवारों के साथ ही प्रवासियों से भी विचार विमर्श करेगी.

इस मौके पर पलायन आयोग के उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने बताया कि इसकी शुरुआत पौड़ी जिले से की जा रही है, शुरुआत में 30 गांवों का चयन कर लिया गया है. नामों की अंतिम घोषणा से पहले स्थानीय लोगों से बात की जा रही है.

जमीन पर लोगों का मालिकाना हक बरकरार रहेगा, सरकार लोगों को साथ लेकर इस योजना पर आगे बढ़ेगी. सीएम ने कहा कि भाजपा के प्रत्येक सांसद ने एक एक गांव गोद लिया है, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने अच्छी सोच दिखाते हुए दुगड्डा ब्लॉक में बंजर हो चुके बौर गांव को गोद लिया है. इससे जल्द सकारात्मक नतीजे देखने को मिलेंगे.

ग्राम्य विकास एवं पलायन आयोग ने राज्य में पलायन रोकने के लिए ईको टूरिज्म को मजबूत बनाने की सिफारिश की है. आयोग ने इसके लिए ईको टूरिज्म की गतिविधियां किसी एक एजेंसी के जरिए संचालित करने के साथ इसके लिए विधिवत नीति तैयार करने की सिफारिश की है. मंगलवार को आयोग उपाध्यक्ष एसएस नेगी ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को संबंधित रिपोर्ट सौंपी.