तीन तलाक अध्यादेश को मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी, कांग्रेस का राजनीति का आरोप

पिछले वर्ष तीन तलाक प्रथा पर सुप्रीमकोर्ट ने रोक लगा दी थी. लेकिन ये प्रथा अब भी जारी है. इसलिए इसे दंडनीय अपराध बनाने की खातिर केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक बार में तीन तलाक (तलाक ए बिद्दत) को दंडनीय अपराध बनाने संबंधी अध्यादेश को मंजूरी दे दी है. केंद्र सरकार ने जनवरी 2017 से 13 सितंबर 2018 तक 4330 के मामले दर्ज किए है.

देश में तीन तलाक के बढ़ते हुए मामलों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने तय कर लिया है. कि वह मुस्लिम महिलाओं को इस डर से निजात दिलाकर रहेगी. मॉनसून सत्र में तीन तलाक विधेयक के संसद में अटके रहने के कारण इस मसले पर अध्यादेश लाने के लिए सरकार को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है. बुधवार को कैबिनेट की बैठक में इस अध्यादेश को मंजूरी दी गई.

दरअसल, राज्यसभा में मॉनसून सत्र के अंतिम दिन तीन तलाक विधेयक पर आम सहमति नहीं बन पाने के कारण इसे स्थगित करना पड़ा था. बीते 15 अगस्‍त को भी कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियों पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था. कि ऐसे कुछ लोग है. जिन्होंने तीन तलाक विधेयक को संसद में पारित होने नहीं दिया. उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को भरोसा दिया कि उनकी सरकार उनके लिए न्याय सुनिश्चित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेगी.

गौरतलब है कि तीन तलाक बिल राज्यसभा में दो सत्र से लंबित पड़ा हुआ है. कांग्रेस और अन्य दलों ने इस पर अपना विरोध कर उसे राज्यसभा में पास होने से रोक दिया है.

रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस को इस मुद्दे पर आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि हमने इसे बार-बार पास करवाने की कोशिश की. करीब 5 बार कांग्रेस को समझाने की कोशिश भी की, लेकिन वोटबैंक के चक्कर में कांग्रेस ने इसे पास नहीं करने दिया. कांग्रेस इसपर वोटबैंक की राजनीति कर रही है.

मोदी ने लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में कहा था, “तीन तलाक प्रथा मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय है. तीन तलाक ने बहुत सी महिलाओं का जीवन बर्बाद कर दिया है और बहुत सी महिलाएं अभी भी डर में जी रही हैं.” उन्होंने कहा कि तीन तलाक प्रथा को खत्म करने के लिए कैबिनेट द्वारा कुछ संशोधनों को मंजूरी देने के बाद उनकी सरकार ने हाल ही में समाप्त हुए मानसून सत्र में संसद में विधेयक लाने का प्रयास किया.