नैनीताल की पहाड़ियों पर मिली तितली की दो दुर्लभ प्रजातियां

उत्तराखंड के नैनीताल की पहाड़ियों पर सिर्फ सिक्किम व असम में पाई जाने वाली डार्क सफायर नामक प्रजाति की तितली पहली बार मिली है. इस प्रजाति को तितलियों के बारे में रिसर्च करने वाली वॉक इन द वुड्स संस्था ने वन विभाग के विशेषज्ञों के साथ मिलकर खोजा है. ज्योलीकोट के नलेना गांव में टीम ने दो दुर्लभ प्रजातियों की तितलियों को कैमरे में कैद किया. रिकॉर्ड से मिलान करने पर पता चला कि एक डार्क सफायर और दूसरी गिरोसिस फिसरा है.

गिरोसिस 80 साल पूर्व कुमाऊं में देखी गई थी. वर्तमान में यह प्रजाति उड़ीसा व नॉर्थ ईस्ट के कुछ राज्यों में ही देखी गई है. उत्तराखंड में इससे पूर्व तितलियों की 550 प्रजातियां रिपोर्ट है. सर्च ऑपरेशन के दौरान टीम ने तितलियों की कुल 65 प्रजातियों को तलाशा.

इनमें चार शेड्यल एक की है. वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट में इस शेड्यूल में बाघ, हाथी व तेंदुआ आता है. हमेशा फुट हिल में मिली डार्क सफायर का वैज्ञानिक नाम हैलियोफोरस इंडिक्स है. इसे सामान्य भाषा में इंडियन पर्पल सफायर भी कहा जाता है. वहीं, गिरोसिस को आम भाषा में डस्की यलो फ्लेट नाम से जाना जाता है. जहां से पहाड़ियों की शुरुआत होती है. उस इलाके में मिलने के कारण इन्हें फुट हिल्स की तितली भी कहते है. तितलियों की आयु एक से चार सप्ताह तक होती हे. दो दुर्लभ तितलियों का मिलना बड़ी बात है. उत्तराखंड हर लिहाज से समृद्ध है. लगातार सर्वे करने पर कई अन्य दुर्लभ प्रजाति यहां दिख सकती है