देना बैंक, विजया बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा के विलय की घोषणा, बनेगा देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक

सरकार ने सोमवार को तीन सरकारी बैंकों -देना बैंक, विजया बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा- को मिलाकर एक नया बैंक बनाने की घोषणा की है, जो देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा और उसका संयुक्त कारोबार 14.82 लाख रुपये का होगा. केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने यह घोषणा की और कहा कि सरकार ने तीनों बैंकों के निदेशक मंडल को इस प्रस्ताव पर विचार करने का निर्देश दिया है.

उन्होंने कहा कि जबतक तीनों बैंकों के निदेशक मंडल द्वारा यह प्रस्ताव पारित नहीं कर दिया जाता है, तब तक ये बैंक स्वतंत्र रूप से कामकाज करते रहेंगे. विलय के बाद बने बैंक के नाम पर विलय के दौरान विचार किया जाएगा.

जेटली ने कहा कि इस विलय से टिकाऊ बड़ा बैंक पैदा होगा, जो देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा. पिछले डेढ़ साल में दूसरी बार सरकारी बैंकों का विलय किया जा रहा है. जेटली ने कहा, “वैकल्पिक प्रक्रिया के तहत आज (सोमवार को) यह फैसला किया गया है और बैंकों के निदेशक मंडलों को इस पर फैसला करने का प्रस्ताव भेजा गया है. निदेशक मंडल की बैठक में विचार-विमर्श के बाद इस पर जरूरी कार्रवाई की जाएगी.”

उन्होंने कहा, “उम्मीद है कि इससे एक और बड़ा बैंक पैदा होगा, जो टिकाऊ होगा. विलय के बाद बना बैंक अपने बैकिंग परिचालन को बढ़ाएगा.”

पिछली बार सरकार ने पांच सहयोगी बैंकों और भारतीय महिला बैंक का भारतीय स्टेट बैंक में एक अप्रैल, 2017 को विलय किया था. इसके बाद देश का सबसे बड़ा बैंक एसबीआई दुनिया के शीर्ष 50 बैंकों में शामिल हो गया.

जेटली ने कहा कि बैंकों का विलय सरकार के एजेंडे में था और बजट में भी इसकी घोषणा की गई थी. सरकार गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए या फंसे हुए कर्जे) के मामलों के निपटारे का इंतजार कर रही है, ताकि इस योजना पर सही ढंग से आगे बढ़ा जाए.

उन्होंने कांग्रेस के इस दावे को खारिज किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को पूरा होने के वक्त फंसा हुआ कर्ज (एनपीए) 2.5 लाख करोड़ रुपये का था. उन्होंने कहा कि वास्तविकता में यह 8.5 लाख करोड़ रुपये था.