दहेज प्रताड़ना केस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला बदला, कहा ‘पति की तुरंत हो गिरफ्तारी’

दहेज़ प्रतारणा (फाइल फोटो) साभार - imp.center

दहेज उत्पीड़न के मामले में पति और उसके परिवार को मिला सेफगार्ड खत्म हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व के अपने फैसले में बड़ा बदलाव करते हुए पति की गिरफ्तारी का रास्ता भी साफ कर दिया है. SC ने शुक्रवार को कहा कि शिकायतों के निपटारे के लिए परिवार कल्याण कमिटी की जरूरत नहीं है. मामले में आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी पर लगी रोक हटाते हुए SC ने कहा कि पीड़ित की सुरक्षा के लिए ऐसा करना जरूरी है. कोर्ट ने आगे कहा कि आरोपियों के लिए अग्रिम जमानत का विकल्प खुला है. कोर्ट के फैसले के मुताबिक पुलिस सीआरपीसी की धारा 41 के तहत काम कर सकेगी, जिसमें पर्याप्त आधार होने पर ही गिरफ्तारी का प्रावधान है.

दहेज प्रताड़ना मामले में सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने पिछले साल दिए अपने फैसले में कहा था कि दहेज प्रताड़ना के केस में सीधे गिरफ्तारी नहीं होगी लेकिन इस फैसले के बाद चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा था कि दहेज प्रताड़ना मामले में दिए फैसले में जो सेफगार्ड दिया गया है उससे वह सहमत नहीं हैं. दो जजों की बेंच के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच ने दोबारा विचार करने का फैसला किया था और सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.

27 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने कहा था कि आईपीसी की धारा-498 ए यानी दहेज प्रताड़ना मामले में गिरफ्तारी सीधे नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दहेज प्रताड़ना मामले को देखने के लिए हर जिले में एक परिवार कल्याण समिति बनाई जाए और समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही गिरफ्तारी होनी चाहिए उससे पहले नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने दहेज प्रताड़ना मामले में कानून के दुरुपयोग पर चिंता जाहिर की और लीगल सर्विस अथॉरिटी से कहा है कि वह प्रत्येक जिले में परिवार कल्याण समिति का गठन करे. इसमें सिविल सोसायटी के लोग भी शामिल हों.