उत्तराखंड : हाईकोर्ट ने रीवर राफ्टिंग और वॉटर स्पोर्ट्स पर नीति के अभाव में लगाई रोक हटा ली

देवभूमि उत्तराखंड में राफ्टिंग व क्याकिंग जैसे ऐंडवेंचरस वॉटर स्पोर्ट्स बड़े पैमाने पर होते  हैं. गंगा नदी समेत तमाम नदियों में इन स्पोर्ट्स का संचालन किया जाता है.लेकिन हाईकोर्ट नैनीताल ने राज्य सरकार को रीवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और अन्य पानी से जुड़े खेलों के लिए उचित नियम और नीति बनाने के निर्देश दिए थे, तब से प्रदेश में इन खेलों पर रोक लगा दी गई थी.

लेकिन उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में रीवर राफ्टिंग और वॉटर स्पोर्ट्स पर नीति के अभाव में लगाई रोक हटा ली है. इसी के साथ कोर्ट ने ऋषिकेश में गंगा नदी में रीवर राफ्टिंग और टिहरी झील में वॉटर स्पोर्ट्स की अनुमति दे दी है. कोर्ट ने कहा कि इनका संचालन नियमों के अनुसार ही होना चाहिए. उत्तराखंड में संसोधित रीवर राफ्टिंग व क्याकिंग नियमावली लागू हो गई है. कैबिनेट में मंजूरी मिलने के बाद राज्यपाल ने भी अब इसकी संसोधित नियमावली को मंजूरी दे दी थी. इसके बाद अब उत्तराखंड में इस नीति को पेश किया गया.

इस वजह वॉटर स्पोर्ट्स के बिजनस से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया था. सैकड़ों परिवारों की आजीविका प्रभावित हो गई थी. अगस्त में उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने संशोधित नियमावली का मसौदा तैयार कर इसका प्रस्ताव कैबिनेट में रखा था. कैबिनेट से ‘उत्तराखंड रिवर राफ्टिंग/क्याकिंग संशोधन नियमावली-2018’ को मंजूरी मिलने के बाद अब राज्यपाल बेबी रानी मार्या ने इसे मंजूरी दे दी है.

अब 65 साल की उम्र तक राफ्टिंग
अब 65 की उम्र तक राफ्टिंग का लुत्फ उठाना संभव हो सकेगा. पहले यह आयु सीमा 14 से 60 साल निर्धारित थी. 16 फुट लंबी राफ्ट में आठ पर्यटक और दो गाइड ही बैठ पाएंगे. इसी प्रकार 14 फुट की राफ्ट के लिए दो गाइड समेत कुल आठ संख्या तय की गई है. प्रत्येक नदी में विशेष अभियानों के लिए अलग से अनुमति लेनी होगी.

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने अपने पूर्व के आदेश में संशोधन करते हुए इसमे लगी रोक हटाने के ये आदेश जारी किए. कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह आर्मी को तीन दिन के भीतर वाटर स्पोर्ट्स की अनुमति प्रदान करे.