बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं, अयोग्य नहीं बनेंगे शिक्षक : योगी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि आज प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक के लगभग 90,000 पद खाली है, और हम देख रहे हैं कि लोग सिर मुंडवा रहे हैं, लेकिन वे इस योग्य नहीं हैं कि शिक्षक के पद ग्रहण कर सकें. वह चाहते हैं कि बिना किसी प्रतियोगिता के उन्हें बच्चों के भविष्य बनाने के लिए शिक्षक की पदवी दे दी जाए, लेकिन प्रदेश सरकार ऐसा नहीं करेगी.

योगी लोकभवन में शिक्षक दिवस के अवसर पर अयोजित राज्य अध्यापक पुरस्कार समारोह को संबोधित कर रहे थे. इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में राज्यपाल राम नाईक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे. कार्यक्रम में 34 अध्यापकों को सम्मानित किया गया.

इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा व राज्य मंत्री अनुपमा जायसवाल और राज्य मंत्री संदीप सिंह एवं कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही, सुरेश राणा मौजूद रहे. इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि देश में बहुत कम ही लोग होते हैं, जो समाज के उत्थान के लिए सदैव तैयार होते हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘पिछले दिनों में सरकार ने 422 पदों पर पुलिस और 68500 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती निकाली थी. जिसमें से 22 लाख आवेदन पुलिस और 105000 आवेदन प्राथमिक शिक्षकों के लिए आए. प्राथमिक शिक्षकों में 41556 परीक्षार्थियों ने परीक्षा पास किया.’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रदेश में पहले भी परीक्षाएं होती थीं, लेकिन वे ठेकेदारी प्रथा से होती थीं. जब हमने जांच कराई कि 15 लाख विद्यार्थियों ने परीक्षा छोड़ी है, वे कौन हैं तो पता चला कि वे वही मुन्ना भाई थे, जो ठेकेदारी प्रथा से परीक्षा पास करते थे.’’

योगी ने कहा, ‘‘शिक्षकों को कभी भी किसी नेता के पीछे नहीं भागना चाहिए. शिक्षक जिस विद्यालय में पढ़ाते हैं, वही अपने बच्चों को भी पढ़ाना चाहिए, क्योंकि जब हम स्कूल जाते थे तो खुद साफ -सफाई करते थे और बाकी व्यवस्था भी किया करते थे.’’

दिनेश शर्मा ने कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश सरकार हमेशा शिक्षकों की समस्याओं को अल्पकाल में ही समाधान के लिए हमेशा तत्पर रहती है. प्रदेश सरकार ने सातवें वेतनमान में 921 करोड़ रुपये दिए हैं.’’

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार शिक्षकों के बारे में बहुत गम्भीर है और बहुत जल्द हम एक वर्ष के अंदर ही 100 अतिरिक्त विद्यालयों की स्थापना करेंगे. प्रदेश सरकार जल्द ही सभी विद्यालयों में इंटरनेट वाईफाई मुफ्त कर देगी. आज पूरे भारतवर्ष में शिक्षकों के पद का बड़ा सम्मान है, क्योंकि उससे बड़ा देश में कोई भी पद नहीं है.’’