कब मनाऐं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, कैसे प्राप्त करें श्रीकृष्ण का आर्शीवाद

हर साल की तरह इस साल भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाने को लेकर लोग असमंजस की स्थिति में हैं. क्योंकि मानव जन्म एक बार ही होता है और उसके समय में कोई भी बदलाव नहीं हो सकता है. इसलिए जिस समय भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ है उसी समय के मुताबिक हमें जन्माष्टमी का पर्व मनाना चाहिए और उसके लिए सिर्फ उस नक्षत्र को केन्द्रित करें, जिस नक्षत्र में जातक का जन्म हुआ है. क्योंकि नक्षत्रों के अनुसार समय परिवर्तित होता रहता है.

इस साल इस त्योहार को लेकर ज्योतिषियों और धर्माचार्यों ने दो अलग-अलग दिन बताए हैं. कुछ ज्योतिषियों का कहना है कि 2 सितंबर को जन्माष्टमी मनाना चाहिए, वहीं कुछ धर्माचार्यों का कहना है कि जन्माष्टमी 3 सितंबर को ही मनाना शुभ रहेगा. 3 सितंबर को जन्माष्टमी (वैष्णव) पर सर्वार्थसिद्धि और अमृत सिद्धि नाम के 2 शुभ योग बन रहे हैं.

इसलिए 2 दिन मनेगी जन्माष्टमी –
काशी के ज्योतिषाचार्य पं. फौजदार तिवारी के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि को रात 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ था. इसलिए जन्माष्टमी का व्रत 2 सितंबर को मनाना चाहिए. चूकि वैष्णव संप्रदाय उदयव्यापिनी तिथि में व्रत-उत्सव मनाते हैं, इसलिए 3 सितंबर को भी जन्माष्टमी मनाई जाएगी.

2 सितंबर की शाम से लग जाएगी अष्टमी तिथि –
भोपाल के ज्योतिषाचार्य पं. प्रह्लाद पंड्या के अनुसार, 2 सितंबर को अष्टमी तिथि रात 8.52 से शुरू होगी और रोहिणी नक्षत्र भी रात 08.06 से लग जाएगा. इस दिन शैव संप्रदाय के लोग जन्माष्टमी पर्व मनाएंगे. इसके अगले दिन यानी 3 सितंबर को सूर्योदय से लेकर रात 8 बजे तक अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र रहेगा. उदया तिथि होने से वैष्णव संप्रदाय के लोग इस दिन जन्माष्टमी का पर्व मनाएंगे.

यह है शैव-वैष्णव मत इसलिए दो दिन पर्व –
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं.आनंदशंकर व्यास के अनुसार, शिव को मानने वाले शैव,विष्णु यानी कृष्ण को मानने वाले वैष्णव कहलाते हैं. शैव मत वाले एक दिन पहले रात में पर्व मनाते हैं जबकि वैष्णव उदियात तिथि के बाद. इसलिए दोनों के पर्व दो दिन तक मनते हैं. शैव मत अनादिकाल से है,जबकि वैष्णव मत 500 वर्ष से.

श्री कृष्ण वैदिक ज्योतिष परामर्श केंद्र एवं भागवत ज्ञानयज्ञ उद्गम ट्रस्ट विनायक कुंज रुड़की के संस्थापक पंडित लोकेश शास्त्री ने कृष्ण कृपा को प्राप्त करने के सुगम उपाय बताते हुए तीन ऐसे मंत्रों को स्पष्ट किया है. जिनके द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की कृपा को प्राप्त किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मनमोहन कृष्ण की भक्ति से जीवन में सुख और सौभाग्य आता है. इसलिए धार्मिक दृष्टि से श्रीकृष्ण के प्रेम और कृपा से मुरादें पूरी करने और काम में कुशलता या सफलता पाने के लिए शास्त्रों में बताए कुछ खास कृष्ण मंत्र बहुत ही असरदार माने गए हैं. यहां बताए जा रहे हैं ऐसे ही 3 मंत्र, जिनमें सात अक्षरी, आठ अक्षरी और बारह अक्षरी मंत्र बोलने और जप करने में बड़े सरल और मंगलकारी कार्य श्रीकृष्ण कृपा से सिद्ध होते हैं

ऊँ गोवल्लभाय स्वाहा
इस सात अक्षरों वाले श्रीकृष्ण मंत्र का जप हर कार्य में कुशलता और सफलता देता है.
ऊँ गोकुल नाथाय नमः
इस आठ अक्षरों वाले श्री कृष्ण मंत्र का जप सारी इच्छाएं पूरी करता है.
ऊँ नमो भगवते श्री गोविन्दाय

इस द्वादश यानी 12 अक्षरों वाले कृष्ण मन्त्र के जप से इष्टसिद्धी सरल अर्थ में भगवान से जैसा शुभ चाहें वैसा हो जाए, हो जाती है. इस प्रकार आप भगवान की कृपा पाकर अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण कर सकते हैं.