हल्द्वानी: आरटीओ स्पीड गवर्नर के नाम पर जमकर वसूली

आरटीओ हल्द्वानी में टैक्सियों में स्पीड गवर्नर लगाने के नाम पर जमकर वसूली का खेल चल रहा है. स्थिति यह है कि 2500 रुपये से चार हजार रुपये कीमत तक के स्पीड गवर्नर लगाने के नाम पर वाहनचालकों से सात हजार से 11 हजार रुपये तक वसूले जा रहे हैं.

यही नहीं, अधिकतर चालकों को रसीद तक नहीं दी जा रही है. हैरत की बात यह है कि मामले की शिकायत दो बार डीएम से कर चुके हैं, लेकिन न तो परिवहन विभाग न ही जिला प्रशासन वसूली पर लगाम कस रहा है. आरटीओ राजीव मेहरा का कहना है कि टेस्टिंग में पास होने के बाद ही कंपनियों को अधिकृत किया गया है. हर कंपनी के स्पीड गवर्नर का दाम अलग है. वसूली की जानकारी नहीं है.

ऐसा है तो कार्रवाई करेंगे. स्पीड गवर्नर इसलिए जरूरी नैनीताल हाईकोर्ट ने कुछ महीने पहले कॉमर्शियल वाहनों में स्पीड गवर्नर लगाने का आदेश दिया था. आदेश में कहा गया था कि ओवरस्पीड के कारण हादसे लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में रफ्तार पर नियंत्रण जरूरी है. टैक्सीचालकों ने डीएम को फिर ज्ञापन सौंपा टैक्सी ट्रैवल्स एसोसिएशन ने गुरुवार को जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन को ज्ञापन सौंपकर स्पीड गवर्नर के नाम पर हो रही अवैध वसूली की शिकायत की.

अध्यक्ष नीरज जोशी ने जिलाधिकारी को बताया कि बीती 30 मई को भी एसोसिएशन की ओर से उन्हें संबोधित ज्ञापन सौंपा गया था. बताया था कि 2500 से 4500 रुपये के गवर्नर के एवज में 7500 से 11000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं.

तीन माह बाद भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुयी है. उन्होंने मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की. यहां सचिव महावीर बिष्ट, उपसचिव दर्शन भंडारी, कोषाध्यक्ष ओमवीर सिंह, संजय लोहनी, कुर्बान जाफरी, चंदन सिंह, दिनेश चंद्र भट्ट, आबिद खान शामिल रहे.