राहुल मानसरोवर यात्रा के लिए औपचारिक विदाई चाहते थे : भाजपा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा शुक्रवार को यह दावा किए जाने के बाद कि राहुल गांधी द्वारा कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए एक औपचारिक विदाई चाहते थे और उन्होंने चीन के राजदूत से उन्हें विदा करने के लिए कहा था. इस बयान के बाद कांग्रेस व भाजपा के बीच विवाद छिड़ गया. राहुल गांधी आज (शुक्रवार) नेपाल के जरिए कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए रवाना हुए.

यहां एक संवाददाता सम्मेलन में भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, “राहुल गांधी चाहते थे कि चीन के राजदूत उन्हें विदाई दें.राजदूत ने इसके लिए विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के लाउंज के इस्तेमाल के लिए अनुमति मांगी थी, जिससे इस स्थान का चीन के राजदूत व देश के दूसरे कूटनीतिक लोगों की मौजूदगी में औपचारिक विदाई देने के लिए इस्तेमाल किया जा सके.”

कांग्रेस ने इस पर जवाबी हमला करते हुए कहा कि भाजपा इस तरह की ‘सस्ती’ राजनीति कर भगवान शिव व मां पार्वती का अपमान कर रही है. कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी व व्यग्र भाजपा इस धार्मिक यात्रा का मजाक उड़ाकर अपनी संकीर्णता व नफरत की मानसिकता दिखा रहे हैं.

सुरजेवाला ने कहा, “इस मंगल यात्रा को हनीमून पर्यटन बताकर भाजपा ने हिंदू धर्म व विश्वास पर घिनौना हमला किया है. “संबित पात्रा ने दावा किया कि विदेश मंत्रालय ने इसका जवाब नहीं दिया. पात्रा ने कहा, “यह समझना चाहिए कि आप राहुल गांधी हैं और चीनी गांधी नहीं हैं तो आपको चीन के राजदूत क्यों विदाई देंगे, जब आप नेपाल जा रहे हैं.इस तरह का कोई प्रोटोकॉल नहीं है.”

उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ऐसा क्यों चाहते थे? इस तरह की मांग चीन के राजनयिक द्वारा क्यों की गई.यह गंभीर है और इस पर कांग्रेस को जवाब देना चाहिए.” उन्होंने कहा, “लेकिन सवाल यह है कि चीन के राजदूत चीन के एक गैर निवासी को क्यों विदाई देना चाहते थे.उन्होंने भारतीय सांसदों व भारतीय नागरिकों के साथ ऐसा कभी नहीं किया.सवाल यही है.इससे चीन का क्या संबंध है.”

भाजपा नेता ने कहा कि वह राहुल गांधी के चीन के संबंध पर सवाल उठा रहे हैं क्योंकि इसके पीछे इतिहास रहा है. उन्होंने कहा, “क्या यह सही नहीं है कि गांधी परिवार को चीन में बीजिंग ओलंपिक के उद्धाटन के लिए आमंत्रित किया गया था.कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चीन सरकार की विशेष अतिथि थीं, हालांकि, उनके पास कोई सरकारी पद नहीं था.इसके बाद भी चीन के राजदूत पूरे परिवार को विदाई देने के लिए हवाईअड्डे पर गए थे.ये रिश्ता क्या कहलाता है.”

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और चीन का संबंध अब सभी को पता है और उन्होंने जानना चाहा कि इस यात्रा के दौरान वह किससे मिलेंगे. उन्होंने कहा, “जब चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आते हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साबरमती के तट पर वार्ता आयोजित होती है तो आप सवाल करते हैं.आप कहते हैं कि प्रधानमंत्री व चीन के राष्ट्रपति साथ-साथ झूला झूलते हैं और आप यहां चीन के राजदूत से औपचारिक रूप से विदाई चाहते हैं.”