पीएम मोदी के औचक पाकिस्तान दौरे पर किसी ने सवाल नहीं उठाया : सिद्धू

पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख को गले लगाकर आलोचनाओं का सामना कर रहे पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने मंगलवार को यहां कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के औचक पाकिस्तान दौरे को लेकर किसी ने भी सवाल नहीं उठाया था.

अपने दौरे का बचाव करते हुए सिद्धू ने कहा, “मेरा दौरा राजनीतिक नहीं था, बल्कि मेरे पुराने मित्र के निमंत्रण पर था. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी बस से लाहौर गए थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफगास्तिान से अपने आधिकारिक दौरे से वापस लौटते समय 2015 में अचानक लाहौर चले गए थे.”

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी से कोई सवाल नहीं कर रहा है.”सिद्धू ने कहा कि 18 अगस्त को इस्लामाबाद में शपथ ग्रहण समारोह में उनके स्थान को अंतिम समय में बदल दिया गया था और उन्हें नहीं पता था कि कौन उनके पास बैठा है.

वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के राष्ट्रपति मसूद खान के पास बैठने पर आलोचना का जवाब दे रहे थे. उन्होंने कहा कि उनका पाकिस्तान दौरा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि है, जो दोनों देशों के बीच शांति चाहते थे.

सिद्धू ने कहा कि उन्हें पाकिस्तान में बहुत सारा प्यार और स्नेह मिला और भारत में मिली कुछ प्रतिक्रियाओं ने उन्हें निराश किया है.सिद्धू ने कहा कि वह आमंत्रण और इमरान खान के बार-बार आग्रह करने पर पाकिस्तान गए थे.

सिद्धू ने कहा, “हमारी सरकार ने भी मुझे पाकिस्तान जाने की इजाजत दी थी. पाकिस्तान द्वारा मुझे वीजा दिए जाने के दो दिनों बाद हमारी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने मुझे फोन किया और बताया कि मुझे वहां जाने की इजाजत मिल गई है.”

दो दिन पहले पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने कहा था कि सिद्धू द्वारा बाजवा को गले लगाना ‘एक अच्छा तरीका नहीं था और इससे पूरी तरह बचना चाहिए’ था.

मुख्यमंत्री ने यहां पत्रकारों से कहा था, “सिद्धू को ऐसा भाव दिखाने से बचना चाहिए था, जब भारतीय सैनिक प्रत्येक दिन सीमा पर मारे जा रहे हैं.”

इसपर सिद्धू ने कहा, “मेरी कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आलोचना की, यह जरूरी नहीं है कि अगर कैप्टन ने मेरे विरुद्ध बोला है तो, मुझे भी उनके खिलाफ बोलना चाहिए.”

उन्होंने कहा, “कैप्टन साहब समेत कांग्रेस के कई लोगों ने इसपर मेरे खिलाफ बोला है. यह लोकतंत्र है और सभी के पास अपना विचार रखने का अधिकार होना चाहिए.”