उत्तराखंड में बाघों के अवैध शिकार पर हाईकोर्ट सख्त

उत्तराखंड में बाघों के अवैध शिकार पर नैनीताल हाईकोर्ट सख्त है. गुरूवार को नैनीताल हाईकोर्ट की जस्टिस राजीव शर्मा व जस्टिस लोकपाल सिंह की पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को आदेश दिया है कि वह 24 घंटों के भीतर कोर्ट में अपना शपथ पत्र दाखिल करें.

कोर्ट ने मुख्य सचिव से पूछा है कि कार्बेट नेशनल पार्क,राजाजी व तराई भाबर में इन शिकार को रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए हैं? इसके साथ ही कोर्ट ने पूछा है कि बाबरिया,गोपी समेत अन्य गिरोह पर क्या कार्रवाई अब तक की गई है? कितने मामले अवैध शिकार के दर्ज है, उन पर क्या कार्यवाही अब तक की गई है ?

हुआ यूं कि राजाजी,कार्बेट व तराई में बाघ के बढ़ते शिकार के मामलों को लेकर वर्तमान में राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी ने जनहित याचिका दाखिल की थी. कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया था कि वन गुजरों के साथ मिलकर शिकारी बाघ का शिकार कर रहे हैं, जिसके बाघों पर संकट छाने लगा है.याचिका में वन गुजरों को रिजर्व फारेस्ट से बाहर करने की मांग की गई थी.

अनिल बलूनी की दाखिल याचिका में यह भी कहा गया है कि इन सबके खिलाफ वन अधिनियम के तहत मामले दर्ज जरुर होते हैं मगर वो छूटकर फिर इसी कारोबार में लग जाते हैं. कोर्ट से इन शिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई. आज कोर्ट में मामला सुनवाई के लिए आया, जिसके बाद कोर्ट ने मुख्य सचिव को कल तक अपना पक्ष रखने के आदेश दिए हैं.