दुष्कर्म मामलों को जल्द निपटारे के लिए 1,023 विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की जरुरत

कानून मंत्रालय के आकलन के मुताबिक देश में महिलाओं और बच्चों के दुष्कर्म मामलों को जल्द निपटारे की नई योजना के तहत पूरे देश में कुल 1,023 ‘विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों’ का गठन करना होगा. कानून मंत्रालय के दस्तावेज के मुताबिक इन अदालतों का गठन ऐसे मामलों की बेहतर जांच और बड़े पैमाने पर आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए होगा.

जानकारी के लिए आपको बता दे कि कानून मंत्रालय के न्याय विभाग ने इन विशेष अदालतों के गठन के लिए खर्च का अनुमान लगाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय को यह ज्ञात दिया कि इसमें कुल 767.25 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. इस योजना के तहत केंद्र सरकार को इन अदालतों के गठन के लिए 474 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे. बाकि शेष राशि राज्यों के जिम्मे होगी. बता दे कि कानून मंत्रालय के दस्तावेजों के मुताबिक दुष्कर्म और बच्चों के यौन शोषण से सुरक्षा कानून (पोस्को) के मामलों की सुनवाई के लिए कुल 1,023 एफटीएससी यानी (फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट) का गठन होना है.

इस योजना का विस्तृत ब्योरा केंद्रीय गृह मंत्रालय को सौप दिया गया है. केंद्र सरकार की यह नई योजना उस नए अधिनियम का हिस्सा है, जिसके तहत 12 साल तक के बच्चों के दुष्कर्म के अपराधियों को सजा-ए-मौत दी जाएगी. बता दे कि आपराधिक कानूनों के संशोधन अधिनियम के तहत भारतीय दंड संहिता (आइपीसी), कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोजर (सीआरपीसी), साक्ष्य अधिनियम और पोस्को अधिनियम में संशोधन किए गए हैं. इस अधिनियम को लाते हुए सरकार ने एक योजना के तहत दुष्कर्म मामलों में राज्यों में फास्ट ट्रैक अदालत का गठन करने का मन बनाया है. इस योजना में आधारभूत ढांचे को और मजबूत करने के लिए सरकार ने अदालतों के साथ निचली अदालतों में जांच अधिकारियों की संख्या, सरकारी वकीलों के अतिरिक्त पदों की संख्या को निर्धारित किया है.

सरकारी वकीलों के लिए नए पदों का सृजन होगा, और केवल ऐसे ही मामलों के लिए जांचकर्ता और विशेष फारेंसिक जांच किट तैयार करने का भी फैसला लिया है. आपराधिक कानून (संशोधन) के अनुसार नई फास्ट ट्रैक अदालतों के साथ ही आगे चलकर दुष्कर्म के मामलों की जांच के लिए सभी पुलिस स्टेशनों और अस्पतालों को विशेष फारेंसिक किट दी जाएगी. यह सभी कदम दुष्कर्म के मामलों की पुष्टि, तेज गति से जांच और सुनवाई के लिए उठाए जा रहे हैं. बता दे कि अब दुष्कर्म के मामले का निपटारा दो माह के अंदर करना होगा. फैसले के खिलाफ अपील का अधिकतम समय छह माह होगा.

एक वरिष्ठ सरकारी अफसर के अनुसार महिलाओं, एससी-एसटी, कमजोर वर्ग और वरिष्ठ नागरिकों से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए देश में पहले से ही 524 फास्ट ट्रैक अदालतें गठित हैं. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने मार्च, 2017 में संसद को यह बताया था कि कुल 524 फास्ट ट्रैक अदालतों में से 100 महाराष्ट्र, 83 उत्तर प्रदेश, 39 तमिलनाडु, 38 आंध्र प्रदेश और 34 तेलंगाना में हैं. कानून मंत्रालय के मुताबिक पूरे देश में फास्ट ट्रैक अदालतो का जल्द ही गठन किया जायेगा, और दुष्कर्म के मामलो पर तेजी गति से जांच और सुनवाई की जाएगी.