प.बंगाल: पीएम की मिदनापुर रैली में ममता सरकार की तरफ से हुआ सुरक्षा नियमों से खिलवाड़: रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में आयोजित पीएम मोदी की ‘कृषि कल्याण समावेश’ रैली के दौरान हुए हादसे को लेकर
तीन सदस्यों वाली उच्चस्तरीय जांच टीम सरकार की तरफ से की गई व्यवस्था में ‘सिक्यॉरिटी प्रोटोकॉल के उल्लंघन’ और ‘व्यवस्था में गड़बड़ी’ की बात कही है.

आपको बता दे की पीएम मोदी की ‘कृषि कल्याण समावेश’ रैली के दौरान टेन्ट गिरने से एक बड़ा हादसा हो गया था. इस हादसे 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे. घटना के अगले दिन पीएमओ और गृह मंत्रालय ने तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी.

टीम ने यह भी पाया कि जिले और जोनल ऐडमिनिस्ट्रेशन में मौजूद ज्यादातर बड़े अधिकारी मीटिंग वेन्यू से कम से कम 5-7 किमी की दूरी पर मौजूद थे और उनमें से किसी ने भी एसपीजी और केंद्र सरकार के अन्य अधिकारियों की तरफ से लगातार आ रही फोन कॉल का जवाब नहीं दिया.

सूत्रों के मुताबिक, टीम ने पुलिस प्रशासन के मामले में ‘कोऑर्डिनेशन की गंभीर कमी’ पाई. तीन सदस्यीय जांच टीम में केंद्रीय सचिवालय में सुरक्षा सचिव, एस के सिन्हा भी सदस्य हैं.

रैली के दौरान ‘सुरक्षा के कई पहलुओं’ को नजरअंदाज किया गया था. सीनियर अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं थे. यह भी देखा गया कि टेंट गिरने से बिजली चली गई थी, जिसके चलते पीएम के टेलीप्रॉम्पटर समेत सभी सिक्यॉरिटी गैजेट्स बंद हो गए थे. इसके बाद बाकी प्रोग्राम के दौरान सिर्फ माइक काम कर रहा था. सूत्रों ने बताया कि इस वजह से कुछ देर मोदी को बिना टेलीप्रॉम्टर देखे भाषण देना पड़ा था.

राज्य सरकार ने इस मामले में अपना बचाव करते हुए कहा है कि रैली के दौरान सुरक्षा में किसी तरह की चूक नहीं हुई थी और न ही सिक्योरिटी प्रोटोकॉल को तोड़ने का किसी तरह का प्रयास किया गया था. हालांकि, जांच टीम का कहना है कि वह उन संभावित घटनाओं के बारे में अधिक चिंतित है, जो पीएम और लोगों के लिए सुरक्षा के गंभीर खतरे पैदा कर सकते थे.

जांच टीम अगले एक से दो दिन में अपनी रिपोर्ट सौंप सकती है. गृह मंत्रालय की ओर से भेजी गई जांच टीम ने ‘रूल बुक’ में लिखे सभी नियमों को लेकर सवाल खड़े किए हैं. जांच के दौरान राज्य सरकार ने अपना बचाव करते हुए कहा कि सुरक्षा में कोई चूक नहीं हुई थी क्योंकि वीवीआईपी के लिए बना डी-जोन (हाई सिक्यॉरिटी जोन) सुरक्षित था और उससे छेड़छाड़ का कोई प्रयास नहीं किया गया था. जांच टीम ने रैली के दौरान भारी लापरवाही के लिए जिला पुलिस प्रशासन और सीनियर पुलिस अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है.