राज्यसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही बाधित

राज्यसभा में आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जे की मांग सहित विपक्ष के विभिन्न मुद्दों पर हंगामे के बीच बुधवार को सदन की कार्यवाही बाधित हुई. संसद की कार्यवाही शुरू होने के तुरंत बाद राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू ने नियमों के स्थगन के लिए दिए नोटिस खारिज कर दिए और सदस्यों से शून्य काल के दौरान अपने मुद्दों को उठाने के लिए कहा.

नायडू ने कहा, “मैंने नियमों का स्थगन नहीं करने का फैसला किया है, लेकिन उल्लेखित मामले महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हैं. मैंने तेदेपा सांसद सी.एम. रमेश द्वारा दिए गए नोटिस को छोड़कर बाकी मामलों को शून्य काल में लेने का फैसला किया है.”

उन्होंने कहा, “रमेश का नोटिस एक महत्वपूर्ण मुद्दे से जुड़ा है. इसे पहले भी उठाया गया है. मैंने इस पर अल्पावधि में विस्तृत चर्चा कराने का फैसला किया है. मंत्री से परामर्श के बाद हम चर्चा के लिए तारीख का निर्णय करेंगे.”

लेकिन रमेश ने जोर देकर मांग की कि चर्चा अभी शुरू की जाए. उन्होंने कहा,”यह नया मुद्दा नहीं है. हम इसे बजट सत्र से उठा रहे हैं.”

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के सदस्य सतीश चंद्र मिश्रा और समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव ने सभापति से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा मार्च में जारी अधिसूचना पर चर्चा शुरू करने के लिए कहा, जिससे शैक्षणिक नौकरियों में कमजोर वर्गों के आरक्षण पर असर पड़ा है.

नायडू ने शोरगुल के बीच सदन की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित कर दी.

कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद व आनंद शर्मा, सपा के राम गोपाल यादव व माकपा के डी.राजा उन सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने भी विभिन्न मुद्दों पर नियमों के स्थगन का नोटिस दिया था.

संसद का मानसून सत्र बुधवार से शुरू हो गया. इसमें 18 बैठकें होनी हैं. मानसून सत्र 10 अगस्त को समाप्त होगा.