उत्तराखंड हाईकोर्ट का फैसला, किसी भी जाति का व्यक्ति मंदिर में कर सकेगा पूजा-पाठ

उत्तराखंड में नैनीताल हाईकोर्ट ने धर्म और जाती के भेदभाव को मिटाने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. कोर्ट ने निर्देश देते हुए कहा की मंदिरों में उच्चकुलीन पंडितो से लेकर निम्न जाति के श्रद्धालुओं को पाठ-पूजा करने से मना नहीं किया जाएगा.

जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए निर्देश जरी किए है. कोर्ट ने कहा की मंदिर में किसी भी धर्म और जाति के लोग जा सकते है किसी के साथ भी धर्म और जाति के नाम पर भेदभाव नहीं किया जाएगा.

इसके साथ ही कोर्ट ने निर्देश देते हुए कहा कि एससी, एसटी और अन्य नि्म्न वर्ग के लोगों को राज्य के किसी भी मंदिरों में जाने और पूजा करने से रोका ना जाए.

इसके अतिरिक्त खंडपीठ ने सुप्रीमकोर्ट के निर्देशों के क्रम में कहा कि मंदिरों का पुजारी किसी भी जाति का हो सकता है लेकिन वह पुजारी पद के लिए प्रशिक्षित और योग्य होना चाहिए. बता दें कि हाईकोर्ट ने राजस्थान निवासी पुखराज और अन्य की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह फैसला लिया है.