14 जुलाई से शुरू होगी पुरी रथ यात्रा, जानें इससे जुड़ा एक पौराणिक रहस्य

इस साल पुरी रथ यात्रा 14 जुलाई 2018 से शुरू हो रही है. आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होने वले इस जगन्नाथ रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपनी बड़ी बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ सवार होते हैं.

भगवान जगन्नाथ से जुड़ा एक पौराणिक रहस्य है जो तकरीबन 5000 वर्ष पुराना है. द्वापर युग में जब श्री कृष्ण वृंदावन छोड़कर द्वारिका नगरी में अपनी पत्नियों संग निवास कर रहे थे, तभी एक बार पूर्ण सूर्य ग्रहण का विरल आया.

इस तीर्थ स्थल पर होते थे इक्कठा
इस अवसर पर सभी यदुवंशियों ने कुरुक्षेत्र स्थित समन्त पंचक नामक पवित्र तीर्थ पर एकट्ठा होने लगे, जहाँ स्नान, उपवास, दान आदि दिया जाता था. ऐसा करके वह अपने पापों का प्रायश्चित करते थे. कई वर्षों बाद जब भगवान कृष्ण वृंदावन आए तो वृंदावन वासी प्रसन्नता से झूम उठे और रथ पर सवार होकर वृंदावन के लिए तैयार हो गए.

जिस रथ पर श्री कृष्ण तथा उनके बड़े भाई बलराम तथा मध्य में बहन सुभद्रा थी. उस रथ के घोड़ों को जब खोल दिया गया तो वहां के सारे स्थान अफने आप जुत गए. भक्तों का अभूतपूर्व प्रेम देखकर परम भगवान श्री कृष्ण ने कहा, “जब तुम मेरे घोड़े (दास) बन ही गए हो तो अब तुम मुझे जहां चाहे ले चलो.”

उसी समय से सब ब्रजवासी मिलकर भगवान श्री कृष्ण के रथ को स्वयं खींचकर तीनों भाई-बहन की जय जयकार करते हुए वृंदावन धाम तक ले गए. तब से लेकर आजतक इसी परंपरा को निभाते हुए जगन्नाथ रथ यात्रा को उसी तरह निकाला जाता है.