कड़ी सुरक्षा के बीच मुन्ना बजरंगी का अंतिम संस्कार

गैंगेस्टर प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी का मंगलवार को यहां मणिकर्णिका घाट पर दाह संस्कार किया गया. बजरंगी की सोमवार को बागपत जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. बजरंगी के 14 साल के बेटे समीर सिंह ने उसकी चिता को आग लगाई.

इस दौरान माफिया डॉन के सैकड़ों समर्थक मौजूद रहे और उन्होंने उसके समर्थन में नारे भी लगाए. उसकी शव यात्रा वाराणसी से लगे जौनपुर जिले के सुरेरी गांव से कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हुई. पीएसी व पुलिस अंतिम संस्कार के दौरान किसी भी अवांछित घटना को रोकने के लिए तैनात थीं.

मुन्ना बजरंगी (51) को सोमवार की सुबह सिर व छाती में दस बार गोली मारी गई थी और उसका शव जेल के अंदर एक गटर में फेंक दिया था. बजरंगी को एक मामले में सोमवार को अदालत में पेश किया जाना था.

घटना स्थल से हथियार बरामद नहीं हुआ. हत्यारे या हत्यारों का पता नहीं चल सका है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जेल के अधिकारियों के निलंबन का आदेश दिया और घोषणा की कि दोषियों को सजा मिलेगी.

बजरंगी के शव को सोमवार की रात पोस्टमार्टम के बाद उसकी पत्नी सीमा सिंह व परिवार के सदस्यों को सौंप दिया गया था. इस बीच सीमा सिंह ने अपनी प्राथमिकी में विधायक सुशील सिंह व एक अन्य गैंगेस्टर धनंजय सिंह को पति की हत्या के मामले में नामित किया है.

मुख्य सचिव (गृह) अरविंद कुमार ने कहा कि हत्या की जांच के आदेश दिए गए हैं. राज्य सरकार के अधिकारी जेल के भीतर हत्या के लिए इस्तेमाल किए गए हथियार के गायब होने पर चुप्पी साधे हुए हैं. मुन्ना बजरंगी के परिजनों ने हत्या में राज्य सरकार के अधिकारियों के इशारे पर जेल अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया है.