खुला ख़त: ‘CM सर! कुछ लोग बचाए जा सकते थे अगर रामनगर में चिकित्सा व्यवस्था दुरुस्त होती’

रामनगर के नजदीक हुआ बस हादसा जिसमें 47 लोगों की जान गई

यह कहना है उत्तरांचल टुडे की पाठक और सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने वाली श्वेता माशीवाल का. उन्होंने खुले ख़त के माध्यम से कई अहम मुद्दे उठाये हैं.

  • क्या सस्पेंड करने से दुर्घटनायें रुक जायेंगीं जबकि उत्तराखंड मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहा है?
  • क्या लचर सिस्टम के आगे सभी आँख मूँद लेंगे?
  • क्या लोगों की जिंदगियों से  खिलवाड़ ऐसे ही होता रहेगा?
  • क्या विधायकों का दायित्व कोई तय करेगा?

श्वेता ने खुला ख़त मुख्यमंत्री के नाम लिखा है और एक आस भी जोड़ी है उनके साथ कि जो काम उत्तराखंड बनने के कई सालों बाद नहीं हो पाया क्या उसके होने की उम्मीद अब है या सिर्फ मुद्दों के द्वारा फिर से जनता के साथ छल हो रहा है. जानते हैं उन्होंने अपने ख़त में क्या लिखा –

 

श्वेता मासिवाल, वत्सल

24 घंटे बाद मुख्यमंत्री ने की पौड़ी बस हादसे पर बड़ी कार्यवाही एसओ धुमाकोट और एआरटीओ धूमाकोट क्षेत्र पौड़ी पर गिरी गाज मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव उत्पल कुमार को दिए इन्हें सस्पेंड करने के निर्देश

माननीय महोदय ,
उपरोक्त खबर पढ़ते ही अंदर से आपको एक पत्र लिखने का भाव आया.
तो अंततः वही कार्यवाही हुई जिसकी उम्मीद थी. कल आप घायलों का हाल लेने आये , स्थिति का जायज़ा लिया और आज यह फरमान जारी कर दिया. लेकिन शायद आप ने कुछ पहलुओं पर ध्यान नही दिया.

पहला – इस मार्ग पर ये इस किस्म की पहली घटना नही थी. रामनगर से सल्ट की दिशा में कोई परिचित आता जाता है तो जब तक पहुँचने के सूचना नही आ जाती तब तक मन घबराया ही रहता है.
फिर एक तो ये संकरा, दूसरा ये रूट चलता कम है.

आस पास के क्षेत्रों को परिवहन से जोड़ने के लिए जो वाहन चलते है उनकी संख्या बहुत कम है. बहुत विकसित भी नही है ये क्षेत्र पर्यटन या रोज़गार की दृष्टि से इसलिए प्राइवेट टैक्सियों का चलन भी बहुतायत में नही है. न ही आस-पास मेडिकल जैसी सुविधाएं. ऐसे में आस पास वाले इस दुर्गम को कैसे सहज बनायें? ध्यान तो इस तरफ देना चाहिए था किस मजबूरी में जान हथेली रख कर एक 40 सीटर में 60 लोग सवार थे?

बस अधिकारी को ससपेंड कर देने से स्थिति सुधर जाएगी ?

अधिकारी माँग करेंगे संख्या बढ़ाने की तो Budget की दुहाई दी जाएगी. रामनगर रोडवेज के हालात से सब वाकिफ है ही. सड़क के गड्ढे भी प्रश्नचिन्ह के घेरे में है.

और फिर बारी आती है, स्वास्थ्य सुविधाओं की. मुखयमंत्री वाक़ई आहत हुए है तब convincing लगता जब हाथों हाथ सबसे नजदीकी रामनगर अस्पताल के ब्लड बैंक को तुरंत सुचारू करने के और अस्पताल के उच्चीकरण के आर्डर भी उसी फुर्ती से टाइप होते जितनी फुर्ती से सस्पेंशन आर्डर टाइप हुए है.

बेहतर ये होता कि अधिकारी को ससपेंड करने के बजाय एक कमेटी बैठाई जाती जिसमें इतना गहरा उतर कर जाँच होती. CM तो आप सबके है. सबको न्याय की दरकार है.

आप अनिल कपूर के नायक के महानायक बन ही रहे है तो पूर्ण रूप से बनिये ना. (ये व्यंग्य नही है, भीतर से उम्मीद है किसी दिन उनके जैसा नायक उत्तराखंड को मिले)

सुना है पीछे दिनों PRO से रिलेटेड भारी खर्चो का खुलासा हुआ है. ऐसी बातों के मूल में जाकर निर्णय लेंगे साहेब तो सारी कुपित जनता आपके PRO होने का कार्य निशुल्क करेगी.

एक तो रामनगर के अस्पताल का उच्चीकरण करवाईये जो इस इलाके का अकेला हस्पताल है और दूसरा बस या अन्य गाड़ियों की संख्या में वृद्धि करवाईये.

और जाते जाते Sir, घटना होते ही वहाँ same day visit कर अधिकारी अमले को राहत कार्य से हटाकर vip मूवमेंट में लगाना भी शायद उन्ही party कार्यकर्ताओ के लिए ठीक था जिनको आपके साथ सेल्फी के माध्यम से अपनी नेतागिरी चमकाने के मौका मिला.

गलत शब्दो के लिए क्षमा.
बस कल से मन आहत है तो लगा आपसे दो बातें कह कर मन हल्का होगा.

क्षमा प्रार्थी.
श्वेता माशीवाल
वत्सल.

(नोट: यह लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. जिनमें  जन सारोकार निहित है.)