ये हैं भारत के अजब गजब गाँव, कही बोली जाती सिर्फ संस्कृत- कोई है जुड़वा गांव

गांव एक ऐसी जगह होती है, जहां पर जाकर हम प्राकृति को करीब से महसूस कर पाते है. लेकिन कई गांव ऐसे भी होते है जो कि प्राकृतिक खुबसूरती के आलावा अन्य दूसरी चीजों के लिए मशहूर है, इसलिए आज हम आपको भारत के कुछ ऐसे अजीबो-गरीब गांव के बारे में बताने जा रहे है जो कि अन्य दूसरे गांव से बिलकुल अलग है.

कच्छ गांव-: गुजरात के कच्छ में बसे एक गांव में दूध या दूध से बनी किसी भी चीज को बेचा नहीं जाता बल्कि जिन लोगों के गाय-भैंस नहीं होती, उन्हें दूध और उससे बनी चीजें फ्री में दे दी जाती है.

सनी सिंगापुर गांव-: महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के सनी सिंगापुर गांव के किसी भी घर के दरवाजा में वहां के लोग ताला नहीं लगाते है. ऐसा करने के पीछे की मान्यता यह है कि इस गांव में जो शानि देव का मंदिर है और शनि भगवान उनके घरों की रक्षा करते है.

मुतरू गांव-: कर्नाटक के शिमोघा के मुतरू गांव में प्राचीन काल से ही संस्कृत बोली जा रही है. 500 परिवार वाले इस गांव में हर इंसान एक दूसरे से सिर्फ और सिर्फ संस्कृत में ही बात करते हैं.

जुड़वा गांव-: केरल के मलप्पुरम जिले में स्थित कोणनी गांव को जुड़वा गांव के रूप में जाना जाता है. वर्तमान में इस गांव में तकरीबन 350 जुड़वा बच्चे है. बता दें इस गांव में बच्चों से लेकर बड़े तक सब जुड़वा है और यहां पर हर 1000 बच्चों में 45 बच्चे जुड़वा पैदा होते है.