‘मन की बात’ में जाने प्रकाश पर्व, डॉक्टर्स डे, कबीर, GST समेत पीएम मोदी ने क्या कहा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 45वीं बार रेडियो के जरिए देश से ‘मन की बात’ की. अपने संबोधन के आरम्भ में पीएम मोदी ने भारत-अफगानिस्तान के बीच हुए पहले टेस्ट मैच की बात कही. उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले बेंगलुरु में भारत और अफगानिस्तान के बीच हुए ऐतिहासिक क्रिकेट मैच को स्मरण करते हुए किया. उन्होंने कहा कि यह हर भारतीय के लिए गर्व की बात है कि अफगानिस्तान का पहला अन्तर्राष्ट्रीय मैच भारत के साथ था. अफगानिस्तान के एक बॉलर राशिद खान ने इस वर्ष IPL में भी काफ़ी अच्छा प्रदर्शन किया था. अफगानिस्तान के राष्ट्रपति श्रीमान अशरफ़ गनी ने twitter पर लिखा था – “अफगानिस्तान के लोगों को अपने हीरो राशिद खान पर अत्यंत गर्व है”.

दोनों देशों के बीच हुए इस पहले मैच में भारतीय टीम ने कुछ ऐसा किया, जो पूरे विश्व के लिए एक मिसाल है. भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेते समय, अफगानिस्तान की टीम को ,जो कि पहली बार अन्तर्राष्ट्रीय मैच खेल रही थी, आमंत्रित किया और दोनों टीमों ने साथ में फोटो ली. Sportsman Spirit और Sportsmanship क्या होती है – इस एक घटना से हम अनुभव कर सकते हैं .खेल समाज को एकजुट करने और हमारे युवाओं में कौशल है, जो प्रतिभा है, उसे खोज निकालने का एक बेहरतीन तरीक़ा है. प्रधानमंत्री ने भारत और अफगानिस्तान, दोनों टीमों को शुभकामनाएँ दीं और ये भी उम्मीद जताई कि दोनों देश आगे भी इसी तरह एक-दूसरे के साथ पूरी Sportsman Spirit के साथ खेलेंगे. पीएम मोदी ने कहा कि 21 जून को चौथे ‘योग दिवस’ पर एक अलग ही नज़ारा था. विश्व-भर में लोगों ने पूरे उत्साह और उमंग के साथ योगाभ्यास किया. ब्राज़ील में, यूरोपीयन पार्लियामेंट हो, न्यूयॉर्क स्थित संयुक्तराष्ट्र का मुख्यालय हो, जापानी नौ-सेना के लड़ाकू जहाज़ हों,सभी जगह लोग योग करते नज़र आए.

पीएम मोदी ने कहा कि सऊदी अरब में पहली बार योग का ऐतिहासिक कार्यक्रम हुआ और बहुत सारे आसनों का demonstration तो महिलाओं ने किया. लद्दाख की ऊँची बर्फीली चोटियों पर भारत और चीन के सैनिकों ने एक-साथ मिलकर के योगाभ्यास किया. उन्होंने कहा कि योग सभी सीमाओं को तोड़कर, जोड़ने का काम करता है. सैकड़ों देशों के हजारों उत्साही लोगों ने जाति, धर्म, क्षेत्र, रंग या लिंग हर प्रकार के भेद से परे जाकर इस अवसर को एक बहुत बड़ा उत्सव बना दिया. यदि दुनिया भर के लोग इतने उत्साहित होकर ‘योग दिवस’ के कार्यक्रमों में भाग ले रहे थे तो भारत में इसका उत्साह अनेक गुना क्यों नहीं होगा.

पीएम मोदी ने कहा कि देश को गर्व होता है, जब सवा-सौ करोड़ लोग देखते हैं कि हमारे देश के सुरक्षा बल के जवानो ने जल-थल और नभ तीनों जगह योग का अभ्यास किया. कुछ वीर सैनिकों ने जहाँ पनडुब्बी में योग किया, वहीं कुछ सैनिकों ने सियाचीन के बर्फीले पहाड़ों पर योगाभ्यास किया. वायुसेना के हमारे योद्धाओं ने तो बीच आसमान में धरती से 15 हज़ार फुट की ऊंचाई पर योगासन करके सबको स्तब्ध कर दिया. देखने वाला नज़ारा यह था कि उन्होंने हवा में तैरते हुए किया, न कि हवाई जहाज़ में बैठ कर. उन्होंने कहा कि स्कूल हो, कॉलेज हो, दफ्तर हो, पार्क हो, ऊँची ईमारत हो या खेल का मैदान हो, सभी जगह योगाभ्यास हुआ. अहमदाबाद का एक दृश्य तो दिल को छू लेने वाला था. वहाँ पर लगभग 750 दिव्यांग भाई-बहनों ने एक स्थान पर, एक साथ इकट्ठे योगाभ्यास करके विश्व कीर्तिमान बना डाला. योग ने जाति, पंथ और भूगोल से परे जाकर विश्व भर के लोगों को एकजुट होकर करने का काम किया है. ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के जिस भाव को हम सदियों से जीते आये हैं, हमारे ऋषि, मुनि, संत जिस पर हमेशा जोर देते हैं, योग ने उसे सही मायने में सिद्ध करके दिखाया है.

पीएम मोदी बोले, मैं मानता हूँ कि आज योग एक स्वास्थ्य और क्रांति का काम कर रहा है. मैं आशा करता हूँ कि योग से स्वास्थ्य की जो एक मुहीम चली है, वो आगे बढ़ेगी और अधिक से अधिक लोग इसे अपने जीवन का हिस्सा बनायेंगे. पीएम मोदी बोले कई लोगों ने मुझे लिखा है कि मैं इस बार की ‘मन की बात’ में 1 जुलाई को आने वाले डॉक्टर्स डे के बारे में बात करूं – सही बात है. उन्होने ‘मन की बात’ के माध्यम से सभी डॉक्टर्स को आगामी 1 जुलाई को आने वाले ‘Doctor’s Day’ की ढेरों शुभकामनाएं दी. उन्होंने कहा कि हम मुसीबत के समय ही डॉक्टर को याद करते हैं लेकिन 1 जुलाई को आने वाला डॉक्टर डे, एक ऐसा दिन है, जब देश हमारे डॉक्टर्स की उपलब्धियों को उत्सव मनाते हैं और समाज के प्रति उनकी सेवा और समर्पण के लिए उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद देता है.

पीएम मोदी ने कहा कि हम वो लोग हैं, जो स्वाभवतः माँ को भगवान के रूप में पूजते हैं, भगवान के बराबर मानते हैं क्योंकि मां हमें जीवन देती है, माँ हमें जन्म देती है, तो कई बार डॉक्टर हमें पुनर्जन्म देता है. डॉक्टर की भूमिका केवल बीमारियों का इलाज़ करने तक सीमित नहीं है. हम वो लोग हैं, जो स्वाभवतः माँ को भगवान के रूप में पूजते हैं, भगवान के बराबर मानते हैं क्योंकि माँ हमें जीवन देती है, माँ हमें जन्म देती है, तो कई बार डॉक्टर हमें पुनर्जन्म देता है. डॉक्टर की भूमिका केवल बीमारियों का इलाज़ करने तक सीमित नहीं है.

अक्सर डॉक्टर परिवार के मित्र की तरह होते हैं. ये हमारे लाइफ स्टाइल गाइड हैं. आज डॉक्टर के पास मेडिकल एक्सपर्जटाइज तो होती ही है,साथ ही उनके पास जेनरल लाइफ स्टाइल ट्रेंड्स के हमारे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में गहरा अनुभव होता है. मोदी ने कहा, “भारत का एक समृद्ध इतिहास रहा है. ऐसा कोई महीना नहीं है, जिसमें कोई-न-कोई ऐतिहासिक घटना न घटी हो. भारत में हर जगह की अपनी एक विरासत है. वहां से जुड़ा कोई संत है, कोई महापुरुष है, कोई प्रसिद्ध व्यक्ति है, सभी का अपना-अपना योगदान है, अपना महात्म्य है.

संत कबीरदास का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ‘सभी जानते हैं कि कबीरदास मगहर क्यों गए थे? उस समय धारणा थी कि मगहर में जिसकी मृत्यु होती है, वह स्वर्ग नहीं जाता. कबीर इस पर विश्वास नहीं करते थे. उन्होंने अपने समय की ऐसी ही कुरीतियां और अंधविश्वासों को तोड़ने का काम किया. इसलिए उन्होंने मगहर में समाधि ली. मोदी ने कहा, “संत कबीरदास जी ने अपनी साखियों और दोहों के माध्यम से सामाजिक समानता, शांति और भाईचारे पर बल दिया. उनकी रचनाओं में हमें यही आदर्श देखने को मिलते हैं और आज के युग में भी वे उतने ही प्रेरक हैं.”

अमृतसर के जलियांवाला बाग हत्याकांड का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, ‘2019 में जलियांवाला बाग की उस भयावह घटना के 100 साल पूरे हो रहे हैं, जिसने पूरी मानवता को शर्मसार किया था. 13 अप्रैल, 1919 का वो काला दिन कौन भूल सकता है, जब शक्ति का दुरुपयोग करते हुए क्रूरता की सारी हदें पार कर निर्दोष और मासूम लोगों पर गोलियां चलाई गयी थी.” बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में एक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, “उनमें जो सबसे महत्वपूर्ण बात थी, वो थी भारत की अखंडता और एकता. हम हमेशा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के एकता के संदेश को याद रखें, सद्भाव और भाईचारे की भावना के साथ, भारत की प्रगति के लिए जी-जान से जुटे रहें.” प्रधानमंत्री ने 2019 में आने वाले गुरु नानक देव जी के 550 वें प्रकाश पर्व को उत्साह और उमंग के साथ मानाने का आग्रह किया और नए सुझाव भी मांगे ताकि इस प्रकाश पर्व को प्रेरणा पर्व बनाया जा सके.

मोदी ने कहा कि दूर-सुदूर गांवों में बेटियाँ कॉमन सर्विस सेंटर के माध्यम से गांवों के बुज़ुर्गों की पेंशन से लेकर पासपोर्ट बनवाने तक की सेवाएं उपलब्ध करवा रही हैं. छत्तीसगढ़ की एक बहन सीताफल को इकट्ठा कर उसकी आइसक्रीम बनाकर व्यवसाय करती है. झारखंड में अंजन प्रकाश की तरह देश के लाखों युवा-जन औषधि केंद्र चलाने के साथ-साथ आस-पास के गावों में जाकर सस्ती दवाइयाँ उपलब्ध करवा रहे हैं. पश्चिम बंगाल का नौजवान केवल अपना सफल व्यवसाय ही नहीं, दस-पंद्रह और लोगों को नौकरी भी दे रहा है, तमिलनाडु, पंजाब,गोवा के स्कूल के छात्र अपनी छोटी उम्र में स्कूल की tinkering lab में waste management पर काम कर रहे हैं.

बेंगलुरु में Corporate Professionals, IT Engineers ने एक सहज ‘समृद्धि ट्रस्ट’ बनाया है और उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए इस ट्रस्ट को activate किया. ये किसानों से जुड़ते गए, योजनाएँ बनाते गए और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सफल प्रयास करते रहे. पहले जो किसान अपने खेतों में एक ही फसल पर निर्भर हुआ करते थे, उपज भी अच्छी नहीं होती थी और मुनाफ़ा भी ज़्यादा नहीं होता था,आज वह न केवल सब्जियाँ उगा रहें हैं और बल्कि अपनी सब्जियों की marketing भी ट्रस्ट के माध्यम से कर के, अच्छे दाम पा रहे हैं. एक तरफ फसल के उत्पाद से लेकर के marketing तक पूरी chain में किसानों की एक प्रमुख भूमिका है तो दूसरी तरफ मुनाफ़े में किसानों की भागीदारी सुनिश्चितकरने का प्रयास है .फसल अच्छी हो, उसके लिए अच्छी नस्ल की बीजें हों,इसके लिए अलग सीड-बैंक बनाया गया है. महिलाओं को भी इससे जोड़ा गया है. यह सीड-बैंक का कामकाज देखती हैं .मैं इन युवाओं को इस अभिनव प्रयोग के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूँ” .

पीएम मोदी ने जीएसटी की चर्चा करते हुए कहा कि जीएसटी को एक साल पूरा होने वाला है ‘One Nation, One Tax’ देश के लोगों का सपना था, वो आज हक़ीक़त में बदल चुका है”.प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के 44वें कार्यक्रम में खेल और बचपन पर चर्चा करते हुए जगजीत सिंह के मशहूर गजल से बचपन को याद किया. पीएम ने कहा कि चिंता होती है कि कहीं हमारे खेल खो न जाए कहीं. खेलों के साथ ये बचपन न खो जाए. अगर ऐसा हुआ तो हम सिर्फ ये सुनते रह जाएंगे- ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो, भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी, मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन.