अगर इन तीन राज्यों में बसपा-कांग्रेस गठबंधन हुआ, तो बढ़ जाएँगी बीजेपी की मुश्किलें

जिस तरह के राजनीतिक हालात बन रहे है उनको देखते हुए इसी साल हो रहे तीन राज्यों के चुनाव मध्य-प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान तीनो राज्यों में भाजपा का सत्ता में दुबारा आना मुश्किल लग रहा है. लेकिन यह तब होगा जब यहाँ पर बसपा- कांग्रेस साथ आकर चुनाव लड़ते है तो भाजपा की मुश्किलें और भी बढ़ जाएंगी खासकर छत्तीसगढ़ में यह दोनों पार्टियां भाजपा की मुश्किलें बढ़ा सकती है, खासकर छत्तीसगढ़ में अपने गढ़ को बचाना भाजपा के लिए मुश्किल हो सकता है. देखने की बात यह है इसी साल तीनो राज्यों में चुनाव होने है और तीनो राज्यों में भाजपा की ही सरकार है.

आपको बता दे कि मध्य-प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बीजेपी 15 सालो से काबिज़ है. तीनो विधानसभा चुनावो में जिस तरह की तैयारियां चल रही है उस लिहाज़ से कांग्रेस और बसपा दोनों गठबंधन के साथ मैदान में उतर सकती है. सूत्रों की माने तो दोनों दलों के बीच सीटो के बटवारे को लेकर मंथन जारी है . हालांकि राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर यह गठबंधन 2013 में हुआ होता तो छत्तीसगढ़ की सत्ता बीजेपी के हाथो से पहले ही निकल गई होती . वर्ष 2013 में छत्तीसगढ़ में विधानसभा की 90 सीटो में से भाजपा को 49 जबकि कांग्रेस को 39 और बसपा को 1 सीट ही नसीब हुई थी, लेकिन वोटो के बटवारे के नज़रिए से देखे तो अगर दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ते है तो इस बार भाजपा को दस से ज्यादा सीटो का नुकसान उठाना पड़ सकता है.

जबकि कांग्रेस-बसपा गठबंधन को 50 से ज्यादा सीटें मिल सकती है और छत्तीसगढ़ में गठबंधन की सरकार बन सकती है . ठीक इसी प्रकार अगर मध्य-प्रदेश में कांग्रेस-बसपा साथ आते है तो प्रदेश का गणितीय समीकरण बदल सकता है . वहीं वर्ष 2013 में एमपी में बसपा ने 230 सीटो में से 227 सीटो पर चुनाव लड़ा था और छह प्रतिशत से ज्यादा वोट लेकर चार सीटें जीतने में कामयाब रही थी . जबकि भाजपा और कांग्रेस के बीच करीब साढ़े आंठ प्रतिशत वोटो का अंतर था और इसी के साथ भाजपा को 165 तो कांग्रेस को 58 सीटें मिली थी. यह ज़ाहिर है कि अगर कांग्रेस और बसपा साथ आते है तो कई सीटो का गणितीय समीकरण में उलटफेर हो सकता है और दोनों दलों को 100 से ज्यादा सीटें मिलेंगी . आपको बतादे दे कि अभी-अभी एमपी में कांग्रेस की स्तिथि में सुधार आया है मगर इसके बावजूद भी शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा मजबूत नज़र आ रही है.

वही राजस्थान में कांग्रेस की स्तिथि एमपी और छत्तीसगढ़ से बेहतर है और माना जा रहा है कि यहां भाजपा का दुबारा सत्ता में आना मुश्किल है. सूत्रों की माने तो दावा किया गया है कि अगर कांग्रेस और बसपा यहां साथ आते है तो कांग्रेस की स्तिथि और भी मजबूत हो जाएगी जिसका खामयाजा भाजपा को भुकतना पड़ सकता है. राजस्थान में 200 विधानसभा सीटें है और वर्ष 2013 के चुनाव में भाजपा ने 163 सीटें जीतकर राजस्थान मे तहलका मचाया था और तब कांग्रेस को महज़ 21 बसपा को 3 और निर्दलिय के खाते में 13 सीटें गयी थी ,लेकिन इस बार कांग्रेस-बसपा गठबंधन हुआ तो सीटो का गणित बदल सकता है.

आपको बता दे कि एमपी में 60 से ज्यादा सीटो पर इस बार बसपा का काफी प्रभाव है तो दूसरी ओर राजस्थान में एक दर्जन सीटो पर उसका असर भी देखने की मिल रहा है. देखने की बात यह कि इस वक़्त बीजेपी के लिए सबसे मजबूत कड़ी छत्तीसगढ़ है तो सबसे कमजोर कड़ी राजस्थान और अगर तीनो राज्यों में बसपा-कांग्रेस गठबंधन हुआ तो बीजेपी की मुश्किलें ज्यादा बढ़ जाएँगी और अपनी सत्ता से भी उन्हें विहीन होना पड़ सकता है .