सरकार नहीं लेती लंगर पर जीएसटी, ये हैं नियम

सांकेतिक फोटो

जीएसटी लागू होने के साथ सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई अफवाहें लोगों में भ्रम में डाल रही हैं. ऐसे में लंगर पर जीएसटी वसूला जा रहा है यह सुनते ही दिमाग में पहली तस्वीर बनती है कि धार्मिक स्थलों में फ्री में बंटने वाले प्रसाद पर यह टैक्स लिया जा रहा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंगर पर जीएसटी लग ही नहीं सकता. दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारों में रोजाना 2 लाख से ज्यादा लोग लंगर खाते हैं.

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि प्रसाद तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली कुछ सामग्री और सेवाओं पर जीएसटी लगता है. मसलन, चीनी, सब्जी, खाने का तेल, घी और मक्खन पर जीएसटी लिया जा रहा है. हालांकि चीनी या घी का इस्तेमाल केवल प्रसाद बनाने में ही नहीं, बल्कि घरों में या फिर होटलों में होता है. अब ऐसे में धार्मिक जगहों के लिए चीनी या घी के लिए अलग से जीएसटी की दर तय करना संभव नहीं. यहां ये भी समझना जरूरी है कि जीएसटी मल्टी स्टेज टैक्स है, ऐसे में इस्तेमाल के आधार पर छूट देना बहुत मुश्किल है.

इसी के आधार पर केंद्र सरकार ने स्कीम लॉन्च की है, जिसके आधार पर जो संस्था पिछले 5 साल से रोजाना 5000 से ज्यादा लोगों को फ्री में लंगर खिला रही है, वो राशन की रसीद दिखाकर टैक्स रिफंड करा सकती है. सिरसा ने बताया कि सीजीएसटी रिफंड की स्कीम आ चुकी है, अब राज्य सरकारों को एसजीएसटी रिफंड करना चाहिए जिससे गुरुद्वारों, मंदिरों, मस्जिदों और गिरजाघरों पर अतिरिक्त बोझ न बढ़े.

विदेशों में बने धार्मिक स्थलों में भी इसी तरह जब हम आटा, दाल या कुछ और खरीदते हैं तो हमें जीएसटी (टैक्स) देना पड़ता है. वहां भी न माफ होता है न रिफंड किया जाता. लाखों डॉलर वसूले जा रहे हैं. अमेरिका के एक गुरुद्वारे के हेड ने बताया कि हम लोग भी टैक्स भर रहे हैं. यहां की सरकार न माफ करती है और न ही रिफंड करती है. यूके में बने गुरुद्वारे हों या फिर ऑस्ट्रेलिया के चर्च सभी लंगर पर टैक्स भरते हैं. लेकिन दुनियाभर में भारत पहला ऐसा देश बना है जहां पर टैक्स रिफंड की बात की गई है.

गुरुद्वारा हेड ने कहा कि हम लोग इसका उदाहरण देशभर में देंगे. यहां की सरकारों से भी मांग करेंगे कि जैसे इंडिया में सरकार ने लंगर की रसद पर लगने वाले टैक्स को रिफंड किया है वैसे ही यहां किया जाए. वहीं उन्होंने बताया कि 70 साल से भारत का हरेक गुरुद्वारा, मंदिर, मस्जिद और गिरजाघर राशन पर टैक्स दे रहे हैं. लेकिन 2007 में पंजाब में बादल सरकार ने एक प्रस्ताव पास कर तीन तख्त और अमृतसर में बने दुर्गियाना मंदिर के राशन पर वसूले गए टैक्स को रिफंड किया.