यूपी : ग्लैंडर्स फारसी नामक घातक बीमारी से ग्रसित 4 बेजुबानों को मिली सजा-ए-मौत

ग्लैंडर्स फारसी नामक घातक बीमारी से ग्रसित चार घोड़ों को मुकर्र समय से 24 घंटे पहले ही सजा-ए-मौत दे दिया गया. चिकित्सकों की पूरी टीम ने सुरक्षा के मानक को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा कवच से लैश इन बेजुबानों को मौत की नींद सुला दिया. न तो ये बेजुबान तड़फड़ाए और न ही बचने का प्रयास किया.

कड़ी सुरक्षा के बीच इन्हें नदी के तट पर जेसीबी मशीन से गहरे गड्ढे में दफन भी कर दिया गया. इन घोड़ों को गड्ढे में इसलिए दफना दिया गया कि उनका संक्रमण किसी भी प्रकार से फैल न सके. जिस समय घोड़ों को मौत के मुंह में ले जाने के लिए अंतिम प्रक्रिया चल रही थी उस समय उनके पालकों के चेहरे पर दर्द साफ झलक रहा था.

गौरतलब है कि लगभग एक माह पूर्व पशुपालन विभाग ने जिले में बीस घोड़ों के खून के सैंपल लेकर उन्हें जांच के लिए राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान प्रयोगशाला हिसार हरियाणा में भेजा था. जांच में दो घोड़े एक घोड़ी व एक खच्चर में ग्लैंडर्स की पुष्टि होने के बाद विभाग में सनसनी फैल गई. इस संक्रामक बीमारी को कोई इलाज न होने के कारण प्रभावित घोड़ों को मौत के आगोश में पंहुचाना ही एकमात्र विकल्प था.

संयोगवश इस बीमारी से प्रभावित सभी घोड़े भीटी विकास खंड के चतुरी पट्टी गांव में स्थित एक ही भट्ठे पर काम करते थे. पशुपालन विभाग के चिकित्सकों की टीम ने शनिवार को भट्ठे पर पंहुचकर उन्हें चिन्हित किया था. साथ ही उनके पालकों से इलाज की बात कही थी लेकिन हकीकत में पशुपालन विभाग इन्हें मारना ही एक विकल्प मानता था. पहले इन घोड़ों को सजा-ए-मौत देने के लिए सोमवार का दिन चुना गया था लेकिन शनिवार की देर शाम उच्चाधिकारियों के दबाव में इसे कर दिया गया.

उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी संजय शर्मा की अगुवाई में गए चिकित्सकों व उनकी टीम ने सभी घोड़ों को सजा-ए-मौत दे दी. इसके पूर्व भट्ठा मालिक ने मुआवजे की रकम के लिए संबंधित अधिकारी से लिखित रूप में ले लिया.

इस कार्य को अंजाम देने के लिए पशु चिकित्सा विभाग ने टीम का गठन किया था. टीम प्रभारी डॉ. सुमति कुमार, डॉ. मुकेश कुमार वर्मा, डॉ. शिव कुमार वर्मा, पशुधन प्रसारी अधिकारी गुलाब सिंह और विनय सिंह के साथ ही सदर अस्पताल के फार्मासिस्ट शशिकांति त्रिपाठी, भीटी रवींद्र श्रीवास्तव, कटेहरी नरेंद्र यादव के साथ प्रभारी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी संजय कुमार शर्मा ने इसे अंजाम दिया. अहिरौली थानाध्यक्ष के संरक्षण में इन्हें दफन कराया गया.