एक और भाजपा सांसद हुए बगावत, मोदी सरकार पर लगाया यह गंभीर आरोप…

उत्तर प्रदेश में भाजपा नेतृत्व के खिलाफ दलित सांसदों की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है. भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले की नाराजगी से शुरू हुआ सिलसिला अब चौथे दलित सांसद तक पहुंच चुका है. अब नगीना से भाजपा सांसद यशवंत सिंह ने मोदी सरकार से नाराजगी जताई है.

जानकारी के अनुसार यशवंत सिंह ने SC/ST एक्ट पर सुप्रीम के फैसले को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है कि वह जाटव समाज के सांसद हैं. मोदी जी लेकिन में इस समाज के लिए कुछ नहीं कर सका. आपकी सरकार ने भी 30 करोड़ दलितों के लिए कुछ नहीं किया. बैकलॉग पूरा करना, प्रमोशन में आरक्षण बिल पास करना, प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण दिलाना आदि मांगें नहीं पूरी की गई.

पीएम मोदी को लिखे पत्र में बीजेपी सांसद ने लिखा था कि जिले के आला अधिकारी उनका उत्पीड़न कर रहे हैं. इस मामले में मैंने 2 बार मुख्यमंत्री योगी से मुलाकात की, लेकिन सीएम ने मुझे डांटकर भगा दिया. छोटेलाल ने पीएम को लिखी चिट्ठी में 2 शिकायतें की. पहली शिकायत में कहा कि प्रदेश में जब अखिलेश सरकार थी, उस समय 2015 में नौगढ़ वन क्षेत्र में अवैध कब्जे की शिकायत मुख्यमंत्री समेत कई लोगों से की, लेकिन कार्रवाई की बजाय अधिकारियों ने मेरे घर को ही वन क्षेत्र में डाल दिया. वहीं दूसरे मामले में सांसद ने लिखा कि अक्टूबर 2017 में मेरे भाई के खिलाफ सपा की तरफ से अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. इसके बाद वोटिंग के दौरान असलहों से लैस अपराधी तत्व के लोगों ने मेरी कनपटी पर रिवॉल्वर तान दी, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर गाली दी. उस समय अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने अपराधियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की.

उत्तर प्रदेश के बहराइच से लोकसभा सांसद सावित्री बाई फुले ने केंद्र की दलित विरोधी नीतियों के खिलाफ आंदोलन किया. उन्होंने कहा कि आरक्षण कोई भीख नहीं बल्कि प्रतिनिधित्व का मामला है. यदि शासक वर्ग ने भारत के संविधान को बदलने और हमारे आरक्षण को खत्म करने का दुस्साहस किया तो भारत की धरती पर खून की नदियां बहेंगी. यह हमारे बाबा साहेब का दिया अधिकार है किसी और के बाप दादा या भगवान का नहीं.

इटावा से भाजपा सांसद अशोक दोहरे पीएम मोदी को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस एससी वर्ग के लोगों पर अत्याचार कर रही है और उन्हें झूठे मुकदमें में फंसा रही है. पुलिस निर्दोष लोगों को घरों से निकाल कर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए उनकी गिरफ्तारी कर रही है. जिससे भारत वर्ष में दलितों की असुरक्षा की भावना बढ़ती जा रही है. मामले की गंभीरता से देखते हुए आपसे अनुरोध है कि आप इस बेहद गंभीर मामले में हस्तक्षेप करें और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश दें.