उत्तराखण्ड में भी देशव्यापी बंद के तहत दलितों ने कराये प्रतिष्ठान बंद

एससी-एसटी उत्पीड़न प्रतिरोधक कानून को लेकर सोमवार देशव्यापी बंद के आह्वान पर उत्तराखंड में भी दलित समाज के लोग सड़कों पर उतर आए हैं. हरिद्वार-दिल्ली हाईवे जगह-जगह जाम है. रोडवेज बसें और अन्य वाहन जाम में फंसे हुए हैं. लक्सर और ऋषिकेश में प्रदर्शनकारियों ने जाम लगाया है. जबकि देहरादून में धरना दिया जा रहा है.

उत्तराखंड संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच ने भारत बंद के समर्थन में घंटाघर पर प्रदर्शन किया. एससी एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में प्रदेश संयोजक दौलत कुंवर के साथ लोग जुटे हैं. हालांकि बाजार बंद पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़ा है. अभी अधिकांश दुकानें खुली हैं. प्रदर्शनकारियों ने करनपुर बाजार बंद कराया है.

उधर, रुड़की में दलित समाज के लोगों ने एससीएसटी के मुद्दे पर शहर में जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया. अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन चल रहा है. जुलूस-प्रदर्शन के कारण हाईवे से लेकर शहर तक जाम हो गया है. रोडवेज बसें कई जगह फंसी हुई हैं. दलित समाज ने सोमवार को प्रदर्शन का ऐलान किया था. रुड़की में हरिद्वार हाईवे पर शेरपुर में बेलड़ा, ब्रह्मपुरी, बेलड़ी, भारपुर, ढंडेरी आदि जगहों के लोग जुटे. इससे हाईवे जाम हो गया.

रामपुर और नगर निगम पुल के पास भी प्रदर्शन किया गया. एमएच चैक पर एसडीएम चैक को भी दिल्ली हाईवे पर जाम किया गया. अलग-अलग जगह से जुलूस लेकर दलित समाज के लोग ज्वाइंट मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचेंगे और प्रदर्शन करेंगे. लक्सर, नारसन और भगवानपुर में भी जाम लगाया गया. शहर में पूरी तरह जाम लगा है. रोडवेज बसें भी फंसी हुई है, पुलिस फोर्स भी मौके पर पहुंचा है. लक्सर में दलित समुदाय का विशाल धरना प्रदर्शन चल रहा है.

केंद्र सरकार पर संविधान में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए बड़ी संख्या में लोग जमा हुए हैं. पुलिस लोगों को समझाने का प्रयास कर रही है. प्रदर्शनकारियों ने फ्लाई ओवर पर जाम लगा दिया है. उधर, भगवानपुर के चुड़ियाला मार्ग पर ग्रामीणों ने जाम लगा दिया है. वहीं बहुजन समाज पार्टी कार्यकर्ताओं ने नारसन में हाईवे जाम किया है. गढ़वाल क्षेत्र की बात करें तो श्रीनगर में एससी एसटी एक्ट को लेकर प्रदर्शन चल रहा है. पौडी में भी शिल्पकार कल्याण समिति ने बैठक कर विरोध जताया. हरिद्वार में पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे दलित समाज के लोगों पर जमकर लाठीचार्ज किया है. इस दौरान कई लोगों के घायल होने की सूचना है. आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. एससी-एसटी उत्पीड़न प्रतिरोधक कानून को लेकर सोमवार देशव्यापी बंद के आह्वान पर हरिद्वार के बहादराबाद में करीब 120 गांवों से दलित समाज के लोग जुटे थे. सैनिक समता दल और भीम आर्मी के बैनरतले ये लोग बीएचईएल तिराहे पर धरना दे रहे थे. करीब दो से ढाई हजार लोगों के सड़क उतरने से हरिद्वार मार्ग पूरी तरह जाम हो गया था.

सुबह करीब दस बजे से ग्रामीण धरने पर बैठे हुए थे. प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं. करीब 12 बजे एसएसपी प्रदर्शनकारियों पर वार्ता करने मौके पर पहुंचे. बताया जा रहा है कि एसएसपी के दस्ते में शामिल ब्लैक कमांडों ने भीड़ पर काबू करने के लिए कुछ लोगों पीछे करना शुरू किया. इस दौरान लोगों पर हल्का बल प्रयोग किया गया. इस बीच लोगों में अफवाह फैल गयी कि पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया है. इससे भगदड़ मच गयी. आरोप है कि पीछे कुछ लोगों ने पुलिस के ऊपर पथराव शुरू कर दिया. देखते ही देखते भीड़ बेकाबू होने लगे.

मौके पर पहुंची पुलिस फोर्स ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया. पुलिस प्रदर्शनकारियों ने पकड़-पकड़ कर पीटा. इस दौरान कई लोगों के घायल होने की सूचना है. पुलिस के लाठी भांजने के बाद प्रदर्शनकारी वहां से भाग खड़े हुए. मौके पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. बड़ी संख्या में फोर्स तैनात की गयी है. एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम में बदलाव से नाराज समुदाय के लोग सड़कों पर उतर आए हैं. उन्होंने केन्द्र की भाजपा सरकार को दलित विरोधी बताते हुए उसके खिलाफ सड़क से लेकर संसद तक आंदोलन का ऐलान किया है.

सोमवार को एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम से नाराज लोगों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा कि देश की भाजपा सरकार जानबुझकर दलितों को निशाना बना रही है. दलितों व ट्राइवल के अधिकारों के संरक्षण के लिए बने अधिनियम में बदलाव कर सरकार समुदाय से जुड़े लोगों के खिलाफ फिर से घटनाओं को बढ़ावा देना चाहती है. उन्होंने कहा कि अधिनियम के चलते दलित उत्पीड़न की घटनाएं कम होती है. लेकिन सरकार इस पर बदलाव कर समुदाय के लोगों को फिर से हासिए में धकेलना चाहती है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि केन्द्र सरकार ने इस अधिनियम में किए गए बदलाव को वापस लेने का फैसला नहीं लिया तो इसके खिलाफ सड़क से लेकर संसद कर आंदोलन किया जाएगा. अनुसूचित जाति व जनजाति की सुरक्षा के लिए बने कानून में बदलाव किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. . इस दौरान सभा के पदाधिकारियों समेत सदस्यों ने तल्लीताल स्थित अंबेडकर से जिलाधिकारी कार्यालय तक मौन जुलूस निकाला. डीएम वीके सुमन के माध्यम से राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा गया.

जुलूस में महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व विधायक सरिता आर्य, भगवत प्रसाद, संजय कुमार, दीवान चंद्र, रमेश चंद्र, अशोक कन्नौजिया, कैलाश अगरकोटी, बच्ची चंद्र, ललित मोहन, हेमा देवी, अंजू, लता देवी आदि शामिल रहे. एससी-एसटी एक्ट में किए गए बदवाव के विरोध को लेकर अंबेडकर पार्क में दलित समाज के लोग सैंकड़ों एकत्र हुए. इसके बाद दलित समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर एडीएम नजूल जगदीश चंद्र कांडपाल के जरिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछले दिनों एससी-एसटी में किए गए बदलाव का वह विरोध करते हैं. उन्होंने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार की दलित विरोधी नीतियों के चलते ही यह निर्णय लिया गया है. जिसके चलते जगह-जगह अंबेडकर की मूर्तियां तोड़ी जा रही है. इससे दलित समाज में काफी रोष है. उन्होंने कहा कि देश में लागू एससी-एसटी एक्ट में बदलाव को किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. केन्द्र की भाजपा सरकार ने यदि इस दलित विरोधी फैसले को वापस नहीं लिया तो वह सड़कों पर उतरकर आंदोलन को मजबूर होंगे. एससी एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम बदलाव से नाराज लोग सड़कों पर उतर आए हैं.

एक्ट में बदलाव से नाराज लोगों ने रैली निकालकर केन्द्र की भाजपा सरकार के खिलाफ रोष जाहिर किया. एससी-एसटी एक्ट में बदलाव से नाराज ने लोगों ने अंबेडकर पार्क, गांधी चौक , नगर पालिका तिराहा, चिमस्यानौला, अपटेक सेंटर, गुप्ता तिराहा होते हुए कलेक्ट्रेट तक विशाल रैली निकाली. आंदोलित लोगों ने कहा कि केन्द्र की भाजपा सरकार की दलित विरोधी नीतियों के चलते ही एक्ट में बदलाव के प्रयास किए गए. उन्होंने कहा कि एक्ट में बदलाव को किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा. एक्ट में बदलाव से दलित समाज के खिलाफ उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ेंगी. जिसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा. उन्होंने कहा कि अधिनियम में बदलाव केन्द्र की भाजपा सरकार की दलित विरोधी नीति का ही परिणाम में है. ऐसे में समुदाय के हर व्यक्ति को सरकार की इस नीति के विरोध में एकजुट होकर सड़कों पर उतरना होगा. इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को पत्र भेजकर अधिनियम में बदलाव का विरोध किया.