एससी-एसटी एक्ट में हुए इन बदलावों को लेकर मचा है बवाल

एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद विपक्ष की आलोचना का शिकार हो रही नरेंद्र मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटिशन दाखिल करने वाली है. केंद्रीय कानून मंत्रालय ने एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने को मंजूरी दे दी है.

इसी मुद्दे पर सोमवार को दलित संगठनों द्वारा भारत बंद का आह्वान किया है. इस बंद को देखते हुए पंजाब में सभी शिक्षण संस्थान, ट्रांसपॉर्ट बंद रखने का फैसला किया गया है. राज्य में सोमवार होने वाली 10वीं और 12वीं के सीबीएसई परीक्षाएं भी स्थगित कर दी गई हैं.

एससी एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए बदलाव के खिलाफ देशभर में दलित संगठनों ने बंद का ऐलान किया है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को लेकर केंद्र सरकार पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को महाराष्ट्र के एक मामले को लेकर एससी एसटी एक्ट में नई गाइडलाइन जारी की थी.

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अधिनियम-1989 के दुरुपयोग पर बंदिश लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के एतिहासिक फैसला सुनाया था. इसमें कहा गया था कि एससी एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी. इसके पहले आरोपों की डीएसपी स्तर का अधिकारी जांच करेगा. यदि आरोप सही पाए जाते हैं तभी आगे की कार्रवाई होगी.

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए.के. गोयल और यू.यू. ललित की बेंच ने गाईडलाइन जारी करते हुए कहा था कि संसद ने यह कानून बनाते समय नहीं यह विचार नहीं आया होगा कि अधिनियम का दुरूपयोग भी हो सकता है. देशभर में ऐसे कई मामले सामने आई जिसमें इस अधिनियम के दुरूपयोग हुआ है.

नई गाईडलाइन के तहत सरकारी कर्मचारियों को भी रखा गया है. यदि कोई सरकारी कर्मचारी अधिनियम का दुरूपयोग करता है तो उसकी गिरफ्तारी के लिए विभागीय अधिकारी की अनुमति जरूरी होगी. यदि कोई अधिकारी इस गाईडलाइन का उल्लंघन करता है तो उसे विभागीय कार्रवाई के साथ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई का भी सामना करना होगा.

वहीं, आम आदमियों के लिए गिरफ्तारी जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) की लिखित अनुमति के बाद ही होगी. इसके अलावा बेंच ने देश की सभी निचली अदालतों के मैजिस्ट्रेट को भी गाईडलाइन अपनाने को कहा है. इसमें एससी/एसटी एक्ट के तहत आरोपी की अग्रिम जमानत पर मैजिस्ट्रेट विचार करेंगे और अपने विवेक से जमानत मंजूर और नामंजूर करेंगे.

अब तक के एससी/एसटी एक्ट में यह होता था कि यदि कोई जातिसूचक शब्द कहकर गाली-गलौच करता है तो इसमें तुरंत मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की जा सकती थी. इन मामलों की जांच अब तक इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी ही करते थे, लेकिन नई गाइड लाइन के तहत जांच वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के तहत होगी.

बता दें कि ऐसे मामलों में कोर्ट अग्रिम जमानत नहीं देती थी. नियमित जमानत केवल हाईकोर्ट के द्वारा ही दी जाती थी लेकिन अब कोर्ट इसमें सुनवाई के बाद ही फैसला लेगा. एनसीआरबी 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में जातिसूचक गाली-गलौच के 11,060 मामलों की शिकायतें सामने आई थी. इनमें से दर्ज हुईं शिकायतों में से 935 झूठी पाई गईं.