प्रेमी जोड़े के हत्यारे को फांसी की सजा

देहरादून जिले के चकराता में हुए बहुचर्चित प्रेमी जोड़े की हत्या में कोर्ट का फैसला आ गया है. कोर्ट ने हत्या के मुख्य आरोपी राजू दास को फांसी की सजा सुनाई है. जबकि उसके बाकी तीन साथियों को उम्रकैद की सजा दी है. अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ढकरानी मोहम्मद सुल्तान की अदालत ने आज अपना फैसला सुनाया. दिल्ली से चकराता (देहरादून) घूमने आए प्रेमी जोड़े से लूट, हत्या और साक्ष्य छुपाने के मामले में कोर्ट ने 27 मार्च को चारों आरोपियों को दोषी करार दिया था.

शुक्रवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ढकरानी मो. सुल्तान की अदालत में हत्या सहित विभिन्न मामलों में दोषी करार दिए जा चुके मुख्य अभियुक्त राजूदास, गुड्डू, बबलू और कुंदन दास को ठीक 11 बजे कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने सजा सुनाये जाने से पहले अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष के अधिवक्ता की बहस सुनी. जिसके बाद अदालत ने सजा सुनाई.

पर्यटक जोड़े की हत्या के सूत्रधार रहे राजूदास पुत्र मोहनदास निवासी टुंगरोली चकराता को मृत्युदंड से दंडित किया है. अभियुक्त की मृत्यु होने तक उसे फांसी के फंदे में लटकाने के आदेश दिए हैं. अन्य तीन अभियुक्तों कुंदनदास पुत्र मैनूदास, बबलू पुत्र ध्यानू दास और गुड्डू पुत्र खानियां सभी निवासी टुंगरौली चकराता को हत्या के मामले आजीवन करावास व प्रत्येक से पचास पचास हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया.

बता दें कि अभिजीत पाल (26 वर्ष) पुत्र अतुल पाल निवासी कोलकाता (पश्चिम बंगाल) हाल-नई दिल्ली और मोमिता दास पुत्री मृणाल कृष्णादास निवासी लाडो सराय (नई दिल्ली) 22 अक्तूबर 2014 को दिवाली की छुट्टियों में चकराता आए थे. मगर, इसके अगले ही दिन टाइगर फॉल घूमने के बाद दोनों लापता हो गए. मोमिता के घरवालों ने 23 अक्तूबर को उसे फोन लगाया तो संपर्क नहीं हो पाया.

इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली के लाडो सराय थाने में मोमिता की गुमशुदगी दर्ज करवा दी. पुलिस जांच में मोमिता के फोन की आखिरी लोकेशन चकराता मिली और ईएमआई नंबर खंगालने पर उसके मोबाइल में राजूदास के नाम का सिम भी ट्रैस हो गया. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने विकासनगर और चकराता पुलिस को साथ लेकर राजूदास की तलाश शुरू की. इस दौरान अभिजीत के चचेरे भाई जोयंता पाल और मोमिता के भाई अमिताभ दास भी पुलिस के साथ रहे.

पुलिस ने राजूदास को लाखामंडल, चकराता और टाइगर फॉल में तलाशा. आखिरकार पुलिस राजूदास को जीप के साथ गिरफ्तार करने में सफल रही. कड़ी पूछताछ में राजूदास ने स्वीकारा कि उसने गुड्डू, बबलू और कुंदनदास के साथ मिलकर प्रेमी जोड़े की हत्या की है. इसके बाद आरोपियों की निशानदेही पर मोमिता का फोन, पर्स और कपड़े पुलिस ने बरामद किए गए.

इधर, शवों की खोजबीन के दौरान नौगांव से दो किमी दूर यमुना नदी किनारे से पुलिस को एक शव मिला. जोयंता पाल ने इसकी शिनाख्त अभिजीत के रूप में की. इसके 21 दिन बाद ही मोमिता दास का भी सड़ा गला शव डामटा के पास यमुना किनारे बरामद हो गया. फिर पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी और तब से यह मामला कोर्ट में चल रहा था.

इस मामले में 43 में से बीस गवाहों ने अपने बयान दिए. बचाव पक्ष के अधिवक्ता और अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता गुरुप्रसाद रतूड़ी और सहायक शासकीय अधिवक्ता नरेश बहुगुणा की ओर से पेश साक्ष्यों के बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आरोपियों को लूट, हत्या और साक्ष्य छुपाने का दोषी करार दे दिया. जबकि मगर, दुराचार के आरोप से सभी को बरी भी कर दिया गया. कोर्ट ने शुक्रवार को सजा सुनाई है. पर्यटक जोड़े की हत्या से बदनाम हुई थी पहाड़ की शांत वादियां, अब मिला इंसाफ.