चार सालों में बीजेपी की सरकार 10 राज्यों में, लेकिन यहां पड़ी कमजोर

2019 में लोकसभा चुनाव होने है. जिसकें के लिए बिगुल बज चुका है. केंद्र की सत्तारुढ़ पार्टी बीजेपी को हराने के लिए एक तरफ कांग्रेस विपक्ष को एक करने में जुटी हुई है तो दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी तीसरे मोर्चे की तैयारी में हैं. विपक्ष बेशक से मजबूत होने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बीजेपी कहीं ना कहीं कमजोर पड़ती हुई नजर आ रही है.

2014 में लोकसभा चुनावों में बहुमत हासिल करके केंद्र की सत्ता पर काबिज हुई बीजेपी सरकार के लिए सब कुछ शायद अच्छा नहीं चल रहा है. 2017 से लेकर 2018 तक बीजेपी 11 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ चुकी है, लेकिन एक भी सीट पार्टी के खाते में नहीं गई है.

बता दें कि साल 2014 से लेकर 2018 तक अब तक 23 लोकसभा सीटों पर उपचुनाव हुए हैं, जिसमें से 11 सीटें किसी अन्य पार्टी के खाते में थी. यानि की बीजेपी के पास मौका था 11 सीटों को उपचुनावों के दौरान अपने खाते में करने का लेकिन वह नहीं कर पाई.

हैरानी की बात यह है कि लोकसभा चुनावों में बेशक से बीजेपी कोई खास कमाल कर पाने में विफल साबित रही हो, लेकिन विधानसभा चुनावों में पार्टी अपनी धमक बनाए हुए है. महज 4 सालों में बीजेपी 10 नए राज्यों में अपनी नेतृत्व वाली सरकार बनाने में कामयाब हुई है. बीजेपी उपचुनावों में जिन सीटों पर हारी है. उनमें से 4 कांग्रेस और 2 सपा के खाते में गई है. इसके अलावा एनडीए गठबंधन की दो सीटों में से भी एक ही बचाने में पार्टी सफल हो पाई है.

इन 4 सीटों पर किया कांग्रेस ने कब्जा
रतलाम: 2015 में बीजेपी के दिलीपसिंह भूरिया के निधन के बाद मध्यप्रदेश की इस सीट पर उनकी बेटी निर्मला को पार्टी ने खड़ा किया, लेकिन वह असफल रहीं. कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया ने निर्मला को करीब 88 मतों से मात दी.

गुरदासपुर: 2017 में अभिनेता और बीजेपी नेता विनोद खन्ना के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर उपचुनाव हुए तो जनता ने कांग्रेस पर भरोसा दिखाया. इस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सुनील जाखड़ ने 1.93 लाख मतों से जीत हासिल की.

अलवर: 2017 में बीजेपी सांसद महंत चांदनाथ के निधन के बाद पार्टी के जसवंतसिंह यादव ने चुनाव लड़ा, लेकिन विफल हुए. उपचुनावों में इस सीट से कांग्रेस प्रत्याशी करण सिंह यादव 1.96 लाख मतों से जीतें.

अजमेर: अगस्त 2017 में बीजेपी सांसद सांवरलाल जाट के निधन के बाद बीजेपी ने रामस्वरूप लांबा को टिकट दिया, लेकिन वह कांग्रेस के रघु शर्मा से 84 हजार से ज्यादा मतों से हार गए.

इन सीटों पर किया सपा ने कब्जा
गोरखपुर : यूपी विधानसभा चुनावों में बीजेपी को मिले भारी बहुमत के बाद योगी आदित्य़नाथ को सीएम बनाया गया और यह सीट खाली हुई. इस सीट पर बीजेपी ने सोच समझकर प्रत्याशी तो उतारा लेकिन वह जनता के दिलों में जगह नहीं बना पाया. इस सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार प्रवीण निषाद ने 21 हजार 881 मतों से जीत हासिल की.

फूलपुर: उत्तरप्रदेश की यह सीट बीजेपी के केशव प्रसाद मौर्य के उप-मुख्यमंत्री बनने के बाद खाली हुई थी. उपचुनावों में इस सीट पर सपा के नागेंद्र सिंह पाल ने कब्जा किया और 59 हजार मतों से जीत हासिल की.