उत्‍तराखंड : 2600 फॉरेस्‍ट गार्ड अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए, जंगलों की आग से कैसे निपटेंगे

उत्तराखंड अधीनस्थ वन सेवा नियमावली-2016 के तहत पहले इन वन आरक्षियों को 100 फीसदी पदोन्नति दी जाती थी. उन्‍हें इसके तहत वन दारोगा बना दिया जाता था. लेकिन इस साल 10 मार्च को हुई कैबिनेट बैठक में नियमावली में संशोधन कर दिया गया.

वन दरोगा पद पर 100 फीसदी पदोन्नति के नियम को ही हटा दिया गया था. अब वन दरोगा के 33 फीसदी पद सीधी भर्ती से भरने का प्रावधान कर दिया गया है. यही कारण है कि वन आरक्षी इसका विरोध कर रहे हैं और हड़ताल पर चले गए हैं.

उत्‍तराखंड के 2600 वन आरक्षी (फॉरेस्‍ट गार्ड) 27 मार्च से हड़ताल पर चले गए हैं. दो सूत्रीय मांगों को लेकर ये आरक्षी इस बार आरपार की लड़ाई के मूड में हैं. करीब चार-पांच दिन पहले ही इन आरक्षियों ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी. दूसरी ओर विभाग ने भी दावा किया था कि उन्‍हें मना लिया जाएगा.

लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है. उनकी इस हड़ताल से प्रदेश में चल रहे फायर सीजन को देखते हुए स्थिति चिंताजनक बन गई है. क्‍योंकि गर्मी बढ़ने के साथ ही प्रदेश के जंगलों में आग की घटनाएं भी शुरू हो गई हैं. हड़ताल करने वाले वन आ‍रक्षियों ने 27 मार्च को देहरादून स्थित वन मुख्‍यालय के बाहर प्रदर्शन भी किया था.

2600 वन आरक्षियों ने दो सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल शुरू की है. इस हड़ताल में पूरे प्रदेश के 45 प्रभागों के करीब 2600 फोरेस्ट गार्ड शामिल हैं. उनकी मांग है कि प्रदेश में वन दरोगा की सीधी भर्ती और पदोन्नति की बाध्यता 10 वर्ष तक खत्म करने की जाए. बता दें कि वन विभाग में सबसे पहले स्‍थान पर यही वन आरक्षी या वन रक्षक होते हैं. इनका काम जंगलों में शिकार को रोकना और जंगलों में आग लगने की स्थिति में जमीनी स्‍तर पर उससे निपटना होता है.