उत्तराखंड बोर्ड में बीते 6 साल में छात्रों की संख्या में 18 फीसदी गिरावट

उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा संपन्न होने के बाद अब मूल्यांकन की तैयारी के साथ ही बोर्ड और शिक्षा विभाग के सामने नए सत्र में छात्रों की संख्या बढ़ाने की चुनौती खड़ी हो गई है. हाईस्कूल में छात्रों की लगातार घट रही संख्या शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. दरअसल, बीते 6 साल में हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में पंजीकृत छात्रों की संख्या में 18 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है.

2013 में 1,80,114 छात्र हाईस्कूल परीक्षा में शामिल हुए थे, जबकि इस बार की परीक्षा में 1,49,445 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए. यानी 30 हजार छह सौ 69 छात्र 6 साल में घट गए हैं. चिंता की बड़ी वजह यह भी है कि हाईस्कूल में पंजीकृत छात्रसंख्या में हर साल 3 से 5 फीसदी की गिरावट आ रही है. इससे साफ है कि उत्तराखंड बोर्ड से छात्रों का मोहभंग हो रहा है. इंटरमीडिएट के छात्रों की संख्या में छह वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो बहुत ज्यादा अंतर नहीं है.

बल्कि 2015 में तो वर्ष 2014 के मुकाबले छात्र संख्या 6000 के करीब बढ़ी थी. इसके बावजूद अगर हाईस्कूल में छात्र घटे तो इसका असर आने वाले वर्षों में इंटरमीडिएट पर भी पड़ेगा. हाईस्कूल से इंटर में नहीं आ रहे छात्र छह साल के आंकड़ों को देखा जाए तो उत्तराखंड बोर्ड से हाईस्कूल करने वाले छात्र इसी बोर्ड से इंटर नहीं कर रहे. 2013 में हाईस्कूल में 1,80,114 छात्र पंजीकृत थे. जिनमें से 1,76,823 ने परीक्षा दी. 3291 अनुपस्थित थे.

उत्तीर्ण छात्र 2015 में इंटर परीक्षा में शामिल हुए, तब इनकी संख्या 1,43,169 ही रह गई थी. यानी करीब 33645 छात्र ‘गायब’ हो गए. हाईस्कूल में छात्र संख्या घटी है. प्राइवेट छात्र नेशनल ओपन स्कूल में दाखिला ले रहे हैं. वहां पर हर तीन माह में छात्रों की परीक्षा कराई जा रही है. बोर्ड से छात्रों की संख्या घटने का कारण विद्यार्थियों के सीबीएसई स्कूलों में दाखिला लाना भी है. पहले हाईस्कूल और इंटर के छात्रों को मिलाकर तीन लाख से अधिक संख्या पहुंचा जाती थी, लेकिन अब दो लाख से अधिक छात्र ही पंजीकृत हो रहे हैं.