बर्थडे स्पेशल: फारुख शेख को पहली फिल्म के लिए मिले थे 750 रुपये, और भी जाने बहुत कुछ

अपने कॉलेज के दिनों में बॉलीवुड के सदाबहार एक्टर फारुख शेख थिएटर में काफी एक्टिव रहे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार थिएटर में उनकी बेहतरीन परफॉर्मेंस की बदौलत ही उन्हें 1973 में रिलीज हुई फिल्म ‘गर्म हवा’ में ब्रेक मिला. इस फिल्म के लिए उन्हें 750 रुपये फीस के तौर अदा किए गए.

फारुख शेख मुंबई में लगभग छह साल तक संघर्ष करते रहे. आश्वसन तो सभी देते लेकिन उन्हें काम करने का अवसर कोई नहीं देता था. हालांकि इस बीच उन्हें महान निर्देशक सत्यजीत रे की फिल्म ‘शतरंज के खिलाड़ी’ में काम करने का अवसर मिला लेकिन उन्हें कुछ खास फायदा नहीं हुआ.

फारुख का जन्म आज (25 मार्च) ही के दिन 1948 में हुआ था. साल 1977 से लेकर 1989 तक उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में खूब नाम कमाया. इसके अलावा साल 1999 से लेकर 2002 तक टीवी की दुनिया में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान कायम की. फारुख शेख लॉ के स्टूडेंट थे और उनके पिता चाहते थे कि फारुख भी उनकी तरह वकील के तौर पर नाम कमाएं, लेकिन फारुख की रुचि इस पेशे से ज्यादा एक्टिंग में थी.

Film: Katha Director: Sai Paranjpye Cast: Naseeruddin Shah, Deepti Naval, Farooq Sheikh, Mallika Sarabhai, Tinnu Anand Plot: Katha is loosely based on the famous children’s tale ‘The Hare and the Tortoise’. It is based on S.G. Sathye’s Marathi play ‘Sasa aani Kasav’ (Hare and Tortoise). Rajaram (Naseeruddin Shah) – the tortoise- is a middle class clerk living in a chawl. He is a good-hearted and hardworking man and is often used by people because of his good nature. He is secretly in love with his neighbour Sandhya (Deepti Naval) but can’t tell her because of his timidity. The story takes a turn when one day Rajaram’s fast talking friend Basu Bhatt (Farooq Sheikh) -hare- arrives in the chawl and lives with his friend. He woos Sandhya later who falls for him. It is said that due to the delay in Sparsh’s release, director Sai Paranjpye was so annoyed by Sparsh’s producer Basu Bhattacharya that she named Farooq Sheikh’s character Basu Bhatt (which has slight negative shades). #Katha #NaseeruddinShah #DeeptiNaval #FarooqSheikh #Art #Cinema #IndianCinema #ParallelCinema #India

A post shared by Saiyed Farooq Jamal (@saiyedfarooqjamal) on

फारुख शेख को एक ऐसे अभिनेता के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने समानांतर सिनेमा के साथ ही कमर्शियल सिनेमा में भी दर्शकों के बीच अपनी एक अलग पहचान बनाई. ‘शतरंज के खि‍लाड़ी’, ‘उमराव जान’, ‘कथा’, ‘बाजार’, ‘चश्म-ए-बद्दूर’, ‘क्लब 60’ और कई बेहतरीन फिल्मों में अपने अभिनय से लोगों का दिल जीतने वाले फारुख भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी फिल्में आज भी जेहन में ताजा हैं. फारुख शेख ने सत्यजीत रे, मुज्जफर अली, ऋषिकेश मुखर्जी और केतन मेहता जैसे निर्देशकों के साथ काम किया.

Film: Gaman (1978) Director and Producer: Muzaffar Ali Cast: Farooq Sheikh, Smita Patil, Jalal Agha, Gita Siddharth, Nana Patekar Plot: Ghulam (Farooq Sheikh) re-locates to Bombay to improve his lifestyle on the insistence of his close friend Lallulal Tiwari (Jalal Agha). He leaves behind his mother and also his wife Khairun (Smita Patil). Lallulal gets him to work in a garage where he cleans the car. Later, he learns to drive and is hired to drive the taxi. Lallulal has his own problems. He wants to marry Yashodara (Gita Siddharth) but the latter’s parents want her to support them and send her to Dubai with her brother Vasu (Nana Patekar) forcefully. In spite of his efforts, Ghulam is unable to save money to return back to his village. In the end, he decides to return to his home but procrastination prevents him from doing so. Gaman marks the debut of director Muzaffar Ali, who went on to give the classic ‘Umrao Jaan’ later. It also marks the debut of singer Hariharan. The film perfectly deals with the issue of futility of urban migration. #Gaman #MuzaffarAli #FarooqSheikh #SmitaPatil #NanaPatekar #IndianCinema #Art #India

A post shared by Saiyed Farooq Jamal (@saiyedfarooqjamal) on

फारुख शेख की किस्मत का सितारा निर्माता-निर्देशक यश चोपड़ा की 1979 में प्रदर्शित फिल्म ‘नूरी’ से चमका. बेहतरीन गीत-संगीत और अभिनय से सजी इस फिल्म की कामयाबी ने न सिर्फ उन्हें बल्कि अभिनेत्री पूनम ढिल्लों को भी ‘स्टार’ के रूप में स्थापित कर दिया. वर्ष 1981 में फारुख शेख के सिने करियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म ‘उमराव जान’ प्रदर्शित हुई. मिर्जा हादी रूसवा के मशहूर उर्दू उपन्यास पर आधारित इस फिल्म में उन्होंने नवाब सुल्तान का किरदार निभाया जो उमराव जान से प्यार करता है. अपने इस किरदार को फारुख शेख ने इतनी संजीदगी से निभाया कि दर्शक उसे भूल नहीं पाए हैं.

#farooqsheikh #farrow #sheikh #india #indian #bollywood #actor #movie #tv

A post shared by Joel Block (@joelrblock) on

वर्ष 1982 में फारुख शेख के सिने करियर की एक और महत्वपूर्ण फिल्म ‘बाजार’ प्रदर्शित हुई. सागर सरहदी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उनके सामने कला फिल्मों की दिग्गज स्मिता पाटिल और नसीरुद्दीन शाह जैसे अभिनेता थे. इसके बावजूद वह अपने किरदार के जरिए दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने में सफल रहे. वर्ष 1983 में फारुख शेख को एक बार फिर से सई परांजपे की फिल्म ‘कथा’ में काम करने का अवसर मिला. फिल्म की कहानी में आधुनिक कछुए और खरगोश के बीच रेस की लड़ाई को दिखाया गया था. इसमें फारुख शेख ने खरगोश की भूमिका में दिखाई दिए, जबकि नसीरूद्दीन शाह कछुए की भूमिका में थे. इस फिल्म में फारुख शेख ने कुछ हद तक नकारात्मक किरदार निभाया. इसके बावजूद वह दर्शकों का दिल जीतने में सफल रहे.

“You are so much that it’s breaking my heart.”

A post shared by Minjal Kadakia (@minjalkadakia) on

फारुख शेख के साथ दीप्ति नवल की ऑनस्क्रीन जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया. यह जोड़ी काफी हिट रही. दीप्ति नवल के साथ फारुख शेख ने करीब 7 फिल्मों में काम किया जिनमें ‘चश्म-ए-बद्दूर’, ‘कथा’, ‘साथ-साथ’, ‘किसी से ना कहना’, ‘रंग बिरंगी’ जैसी फिल्में शामिल थीं. 90 के दशक में भी फारुख कुछ एक फिल्मों में नजर आए जिनमें ‘सास, बहू और सेंसेक्स’, ‘लाहौर’ और ‘क्लब 60’ शामिल हैं. ‘लाहौर’ में उनके अभिनय के लिए उन्हें साल 2010 में बेस्ट सर्पोटिंग एक्टर के रोल के लिए नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया.

2014 में रिलीज हुई ‘यंगिस्तान’ फारुख शेख की आखिरी फिल्म थी. फारुख शेख टीवी शो ‘जीना इसी का नाम है’ के लिए मशहूर हुए. इस शो में उन्होंने कई जानी मानी हस्तियों के इंटरव्यू किए. 28 दिसंबर 2013 को फारुख शेख दिल का दौरा पड़ने से इस दुनिया को अलविदा कह गए.